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Sultanpur News: सुल्तानपुर के रहने वाले एक शिक्षक जो दिनभर शिक्षा के क्षेत्र में बतौर अध्यापक काम करते हैं और सुबह-शाम वे अपने खेतों में कुदाल और फावड़ा चलाते हैं. उन्होंने शिक्षा को ना छोड़ते हुए खेती और किसानी करने का फैसला किया. आइए इस शख्स की पूरी कहानी आपको बताते हैं.

सुल्तानपुर: कहते हैं कि अगर दिल में हौसला और जुनून हो तो कोई भी आदमी किसी भी काम को आसानी से कर सकता है. इसी का उदाहरण पेश किया है सुल्तानपुर के रहने वाले एक शिक्षक डॉक्टर सभाजीत यादव ने, जो दिनभर शिक्षा के क्षेत्र में बतौर अध्यापक काम करते हैं और सुबह-शाम वे अपने खेतों में कुदाल और फावड़ा चलाते हैं. उन्होंने शिक्षा को ना छोड़ते हुए खेती और किसानी करने का फैसला किया और 3000 से अधिक केले के पौधे लगाकर वे अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या है सभाजीत के सफलता की कहानी.

करते हैं यह काम
सुल्तानपुर के कादीपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले बरवारी ग्राम सभा के रहने वाले डॉक्टर सभाजीत यादव लोकल 18 से बताते हैं कि उन्होंने पीएचडी किया हुआ है और एक इंटर कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम कर रहे हैं. इसके साथ ही खेती और किसानी भी करते हैं, जिसका परिणाम रहा कि उन्होंने अपने शैक्षिक और वैज्ञानिक सोच को खेती में शामिल किया, जिसकी बदौलत खेती में उनको अच्छा मुनाफा भी हासिल हुआ है.

आपको बता दें कि डॉक्टर सभाजीत यादव शिक्षक के साथ-साथ केले की खेती कर रहे हैं. वह 3000 से अधिक केले के पौधे लगाए हैं. वह बताते हैं कि खेती और किसानी को यदि वैज्ञानिक तरीके से किया जाए, तो हम पारंपरिक खेती धान और गेहूं के अलावा अन्य तरीके से कर सकते हैं और पारंपरिक खेती के मुकाबले अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

यहां से आया आइडिया
सभाजीत यादव ने बताया कि वह एक शिक्षक के रूप में काम करते हैं, लेकिन गांववालों को देखकर उन्होंने खेती और किसी करने का फैसला किया. उन्होंने बताया कि कई लोगों ने उनके गांव में केले की खेती की है, जिसको देखकर उनका भी आइडिया आया. तभी से उन्होंने केले के खेत को तैयार करना शुरू किया और हजारों में पौधे लगाकर अब वे केले से अच्छी कमाई कर रहे हैं.

खेती में भी है फायदा
सभाजीत कहते हैं कि आज के समय में बेरोजगारी का डर बहुत ज्यादा है और ज्यादा तरीका खेती और किसी से दूर भागना चाहते हैं. यदि वह अपने खेतों में जमकर मेहनत करें और कृषि को वैज्ञानिक तरीके से करें, तो निश्चित रूप से खेती में और अधिक फायदा होने वाला है. इससे न सिर्फ उनको ऑर्गेनिक भोजन मिलेगा, बल्कि उससे उनकी आय का स्रोत भी बढ़ सकेगा.

About the Author

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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