पूरा मामला और आयोग का एक्शन
· विवादास्पद बयान: चुनावी रैली के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें “आतंकवादी” कहा था.
· आयोग का नोटिस: चुनाव आयोग ने इसे ‘मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट’ (MCC) का गंभीर उल्लंघन माना है. आयोग के मुताबिक, व्यक्तिगत हमले और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है.
· अल्टीमेटम: खरगे को अपना पक्ष रखने के लिए केवल कल (23 अप्रैल) तक का समय दिया गया है. 24 घंटे की यह समयसीमा आयोग की गंभीरता को दर्शाती है.
· बीजेपी की शिकायत: भारतीय जनता पार्टी ने इस बयान को लेकर आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें इसे प्रधानमंत्री पद की गरिमा और करोड़ों मतदाताओं का अपमान बताया गया था.
क्या हो सकता है चुनाव आयोग का अगला कदम?
1. प्रचार पर प्रतिबंध: यदि आयोग खरगे के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है तो उन पर 24 से 72 घंटे तक चुनाव प्रचार करने पर रोक लगाई जा सकती है. इससे पहले भी आयोग ने भड़काऊ बयानों पर कई बड़े नेताओं के साथ ऐसा किया है.
2. कड़ी निंदा और चेतावनी: आयोग खरगे के बयान की सार्वजनिक रूप से कड़ी निंदा कर सकता है और भविष्य में ऐसे बयानों की पुनरावृत्ति पर सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज करने का निर्देश दे सकता है.
3. पार्टी के लिए एडवाइजरी: ईसीआई कांग्रेस पार्टी के लिए एक सख्त एडवाइजरी जारी कर सकता है कि उनके स्टार प्रचारक मर्यादा का उल्लंघन न करें, अन्यथा उनके स्टार प्रचारक का दर्जा रद्द किया जा सकता है.
4. राजनीतिक प्रभाव: चुनाव के ऐन वक्त पर इस तरह के नोटिस से कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा में आना पड़ सकता है, जबकि बीजेपी इसे चुनावी मुद्दा बनाकर जनता के बीच ‘अपमान’ कार्ड खेल सकती है.
सवाल-जवाब
चुनाव आयोग ने मल्लिकार्जुन खरगे को नोटिस क्यों दिया है?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक रैली में पीएम नरेंद्र मोदी को “आतंकवादी” कहा था. आयोग ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन और भाषाई मर्यादा का अपमान मानते हुए नोटिस जारी किया है.
खरगे को जवाब देने के लिए कितना समय मिला है?
उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए महज 24 घंटे का समय दिया गया है. यह समयसीमा कल (24 घंटे के भीतर) समाप्त हो जाएगी.
अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो क्या कार्रवाई हो सकती है?
चुनाव आयोग खरगे के चुनाव प्रचार पर कुछ दिनों के लिए प्रतिबंध लगा सकता है या उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे सकता है.
क्या इससे पहले भी किसी नेता पर ऐसी कार्रवाई हुई है?
हां, चुनाव आयोग पहले भी योगी आदित्यनाथ, मायावती और आजम खान जैसे नेताओं पर विवादित बयानों के चलते प्रचार करने पर अस्थाई प्रतिबंध लगा चुका है.
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