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Agriculture News: गोंडा की महिला किसान ने साबित कर दिया है कि अगर खेती में थोड़ा सा दिमाग और नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, तो कम लागत में भी बंपर मुनाफा कमाया जा सकता है. आठवीं पास गिरिजा देवी ने पारंपरिक खेती का रास्ता छोड़कर मचान विधि से लौकी उगाना शुरू किया, जिससे न केवल उनकी फसल की गुणवत्ता सुधरी बल्कि आमदनी भी कई गुना बढ़ गई. महज 1000 रुपये की लागत लगाकर वे अब 40 हजार रुपये तक की कमाई कर रही हैं.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के झंझरी ब्लॉक की एक महिला किसान आज अपनी मेहनत और समझदारी से दूसरों के लिए प्रेरणा बन गई हैं. मधईपुर की रहने वाली गिरिजा देवी ने खेती के पुराने ढर्रे को बदलकर ‘मचान’ (ऊंचे ढांचे) पर लौकी की खेती शुरू की है. इस नए तरीके ने न केवल उनकी मेहनत को कम किया है, बल्कि उनके बैंक बैलेंस को भी बढ़ा दिया है. गिरिजा देवी की कहानी बताती है कि खेती को अगर सही तकनीक से किया जाए, तो यह घाटे का नहीं बल्कि बड़े फायदे का सौदा है.
गिरिजा देवी ने सिर्फ आठवीं तक की पढ़ाई की है. शादी के बाद वे एक साधारण हाउसवाइफ थीं, लेकिन घर का खर्च चलाने के लिए उन्होंने खेती में हाथ आजमाने का फैसला किया. पिछले 7-8 सालों से वे लगातार खेती कर रही हैं. पहले वे पारंपरिक तरीके से जमीन पर लौकी उगाती थीं, लेकिन उसमें काफी नुकसान होता था. फिर उन्होंने ‘पानी संस्थान’ से मचान विधि के बारे में सीखा और इसे अपने खेत में लागू किया. आज वे लगभग एक बीघे में इस आधुनिक तरीके से खेती कर रही हैं.
क्यों खास है मचान विधि और इसके फायदे
मचान विधि में बांस या लकड़ी के सहारे एक ऊंचा ढांचा तैयार किया जाता है, जिस पर जाली बिछाई जाती है. लौकी की बेल इसी जाली पर चढ़ती है और फल नीचे की तरफ लटकते हैं. गिरिजा देवी बताती हैं कि जमीन पर खेती करने से लौकी के फल जल्दी खराब हो जाते थे और उनमें कीड़े लगने की संभावना ज्यादा रहती थी. मचान पर फसल रहने से हवा और रोशनी पर्याप्त मिलती है, जिससे फल एकदम साफ और स्वस्थ रहते हैं. साथ ही, इसमें रोग कम लगते हैं और फसल जल्दी तैयार हो जाती है.
गिरिजा देवी अपनी खेती में रसायनों का इस्तेमाल न के बराबर करती हैं. वे गोबर की खाद और जैविक खाद पर ज्यादा भरोसा करती हैं, जिससे फसल की शुद्धता बनी रहती है. सबसे चौंकाने वाली बात इस खेती की लागत है. उन्होंने बताया कि एक बीघा में मचान तैयार करने और बीज आदि में उनका खर्च मात्र 1000 रुपये के आसपास आया है, क्योंकि इसमें ज्यादातर मेहनत का काम है. वहीं, इस छोटी सी लागत से वे सीजन में 30 से 40 हजार रुपये तक का मुनाफा आसानी से कमा लेती हैं.
दूसरी महिलाओं के लिए संदेश
गिरिजा देवी का कहना है कि वे भविष्य में इस काम को और बड़े स्तर पर ले जाना चाहती हैं. वे बरसात के मौसम में करीब 3-4 बीघे में मचान विधि से खेती करती हैं. वे अन्य किसानों और खासकर महिलाओं को यह संदेश देना चाहती हैं कि वे भी ‘लता’ वाली फसलों (जैसे लौकी, तरोई, करेला) के लिए मचान विधि अपनाएं. इससे मेहनत कम और मुनाफा ज्यादा होता है. आज उनकी यह कामयाबी देखकर इलाके की अन्य महिलाएं भी खेती की इस नई तकनीक की ओर आकर्षित हो रही हैं.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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