कोरबा के एक गांव में 6 बेड वाला सर्वसुविधा युक्त स्वास्थ्य केंद्र है. गंभीर बीमारी का पता लगाने के लिए लैब भी है. यहां माइक्रोस्कोप, सेंट्रीफ्यूज, एनालाइजर और सेमी ऑटो एनालाइजर जैसी महत्वपूर्ण इक्विपमेंट उपलब्ध है, मगर इसे चलाने वाला कोई नहीं है. इस अस्पताल में पिछले एक साल लैब टेक्नीशियन नहीं है.
ये तस्वीर जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर बसे लेमरू गांव की है. इस बीहड़ गांव में भी 6 बेड वाला सर्वसुविधा युक्त स्वास्थ्य केंद्र है. गंभीर बीमारी का पता लगाने के लिए लैब भी है. यहां माइक्रोस्कोप, सेंट्रीफ्यूज, एनालाइजर और सेमी ऑटो एनालाइजर जैसी महत्वपूर्ण इक्विपमेंट उपलब्ध है मगर इसे चलाने वाला कोई नहीं है. इस अस्पताल में पिछले एक साल लैब टेक्नीशियन नहीं है. ऐसे में लाखों का इक्विपमेंट बेकार पड़ा है. जिसके कारण इलाके के आदिवासी ग्रामीणों को जांच के लिए भटकना पड़ रहा है.
लेमरू के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक MBBS डॉक्टर हैं. एक आयुष चिकित्सक पदस्थ है.
दवाइयों की भी कमी
इसके अलावा 3 RMA और 4 स्टाफ नर्स ड्यूटी पर तैनात है. यहां दवाइयों की भी कमी नहीं है. प्रसव के मामले में भी अस्पताल अव्वल है. एक साल के भीतर 170 सुरक्षित डिलीवरी कराई जा चुकी है. इस केंद्र के जरिए आदिवासी ग्रामीणों को बेहतर इलाज मिल रहा है. मगर लैब टेक्नीशियन के अभाव में लोगों को अपने ब्लड ग्रुप की जानकारी भी नहीं मिल पा रही है. किडनी, लीवर, दिल संबंधी बीमारी, ESR, DLC, पीलिया का भी टेस्ट नहीं हो पाता.
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