सीडीएससीओ ने राज्यों को बाजार में धड्ल्ले से बेची जा रहीं ड्राई आईज की बिना मंजूरी वाली आई ड्रॉप्स पर तुरंत रोक लगाने का आदेश दिया है. ये ड्रॉप्स आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. साथ ही इन दवा निर्माताओं के खिलाफ भी कड़ा एक्शन लेने के लिए कहा है. आइए जानते हैं विस्तार से..
ड्राई आईज के लिए बाजार में बेची जा रहीं इन आई ड्रॉप्स को लेकर सीडीएससीओ ने सभी राज्यों को बैन लगाने का निर्देश दिया है.
सीडीएससीओ ने सभी राज्यों को बाजार में बेची जा रहीं ड्राई आईज की ड्रॉप्स की मंजूरी को तुरंत रद्द करने और इसे बनाने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के लिए कहा है. सीडीएससीओ की ओर से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के दवा नियंत्रकों को भेजे गए एक संदेश में कहा गया है कि’सोडियम हाइलूरोनेट आई ड्रॉप्स 0.3%’ का निर्माण और बिक्री बिना केंद्रीय प्राधिकरण से अनिवार्य मंजूरी के की जा रही है, जिस पर तत्काल रोक जरूरी है.
बताया गया कि यह फॉर्मूलेशन नई दवा की श्रेणी में आता है जिसे बाजार में बेचने से पहले मंजूरी लेना जरूरी है, लेकिन पता चला है कि इसे बिना नियामक की मंजूरी के ही बाजार में मरीजों को बेचा जा रहा है. इससे लोगों की आंखों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है. वहीं लोग इस दवा को ड्राई आईज यानि सूखी आंखों की परेशानी होने पर ले रहे हैं.
ड्राई आइज के क्या लक्षण हैं?
- . आंखों में जलन और लगातार खुजली होना
- . पलक, आंख की कोर में चुभन या किरकिरापन महसूस होना
- . लाल आंखें होना या हल्की लालिमा आना
- . आंखों से पानी आना
- . नजर का कमजोर या धुंधला होना
- . आंखों में भारीपन और थकान होना
- . रोशनी की तरफ देखने पर संवेदनशीलता महसूस होना
- . सुबह उठने पर आंखों का चिपकना
कैसे काम करती हैं ये आई ड्रॉप्स
एम्स आरपी सेंटर की प्रोफेसर डॉ. नम्रता शर्मा बताती हैं कि आमतौर पर ये आई ड्रॉप्स आर्टिफिशियल टियर्स यानि कृत्रिम आंसुओं के रूप में काम करती हैं और सूखी आंखों और जलन को कम करती हैं. इन आई ड्रॉप्स को डालने से आंखें नम रहती हैं और बेचैनी भी कम होती है, लेकिन अगर यही आई ड्रॉप्स खराब क्वालिटी की हों तो आंखों को राहत देने के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकती हैं. इसीलिए CDSCO ने सलाह दी है कि आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह पर करें. अगर कोई दवा मंजूर नहीं है तो उससे आंखों को खतरा हो सकता है.
इन आई ड्रॉप्स के ये हैं बड़े नुकसान
- . बिना अप्रूवल वाली आई ड्रॉप्स आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं. ये आंखों में जलन को और बढ़ा सकती हैं. ड्राई आइज को और सूखा कर सकती हैं.
- . इन दवाओं क डालने से आंख में कंजंक्टिवाइटिस या पिक आई जैसे संक्रमणों का खतरा पैदा हो सकता है.
- . ड्राई आंखों की सतह पहले से ही कमजोर होती है, इसलिए बिना जांच-परख वाले प्रोडक्ट्स फायदे के बजाय ज़्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं.
- .इन दवाओं की गुणवत्ता, शुद्धता और फॉर्मूलेशन की कोई गारंटी नहीं होती. खराब निर्माण प्रक्रिया अपनाए जाने के कारण ये आंख को फायदे के बजाय नुकसान कर सकती हैं और कई बार इस दवा का असर कम होने से आंख में रोग बढ़ भी सकता है.
कौन सी बातें हैं बेहद जरूरी
- . डॉक्टरों का कहना है कि बिना मंजूरी वाली दोनों ही आई ड्रॉप्स को भी खोलने के एक महीने बाद फेंक देना चाहिए, ताकि ये आंखों में संक्रमण न फैला सकें.
- . बिना डॉक्टर की सलाह के आंखों की कोई भी दवा इस्तेमाल न करें.
- . कैमिस्ट या मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर आंखों में न डालें. डॉक्टर की सलाह के बाद ही कोई दवा डालें. ये बात समझें कि आंखें बहुत अनमोल हैं, एक बार नुकसान होने के बाद इन्हें वापस पाना बहुत मुश्किल है.
About the Author
Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें
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