भारतीय नदी परिषद द्वारा आयोजित ‘हिंडन शोध यात्रा’ कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने नदियों के संरक्षण, पुनर्जीवन एवं जनभागीदारी के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे। अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि नदियां केवल जलधारा नहीं, बल्कि जीवनधारा हैं, जो हमारी संस्कृति, सभ्यता और अस्तित्व का आधार हैं। उन्होंने कहा कि भारत को समझना है तो उसकी नदियों को समझना होगा।
स्वतंत्र देव ने ‘हिंडन शोध यात्रा’ को एक जन-जागरण और जन-आंदोलन बताते हुए कहा कि यह यात्रा केवल 355 किलोमीटर का सफर नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक देश की सभी नदियों को निर्मल एवं अविरल बनाने का लक्ष्य है, जो सरकार और समाज के संयुक्त प्रयास से ही संभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतियां सरकार बनाती है, लेकिन वास्तविक परिवर्तन समाज लाता है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि युवा केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की शक्ति हैं और उनके संकल्प से सूखी नदियां भी पुनः जीवित हो सकती हैं।
हिंडन नदी की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि अनियोजित शहरीकरण, सीवेज डिस्चार्ज और औद्योगिक अपशिष्ट ने नदियों पर दबाव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि नदी कभी नहीं मरती, बल्कि हमारी संवेदनाएं समाप्त हो जाती हैं। उन्होंने नदी पुनर्जीवन के लिए पौधारोपण, तालाब निर्माण, नदी सफाई, प्राकृतिक खेती और जन-जागरूकता अभियानों को आवश्यक बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि नदी को साफ करने से अधिक जरूरी है उसे गंदा होने से रोकना।
स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ‘एक जनपद-एक नदी’ योजना, आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट , नालों की टैपिंग, जलाशयों के पुनर्जीवन एवं भूजल पुनर्भरण जैसे अनेक कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन आंदोलन है। यदि उद्योग, किसान और आम नागरिक संकल्प लें, तो नदियों को स्वच्छ बनाने में अधिक समय नहीं लगेगा। अंत में उन्होंने कहा कि स्वच्छ जल ही सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है और उत्तर प्रदेश इस दिशा में उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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