‘विरासत बचाओ अभियान’ वैशाली की ऐतिहासिक विरासत को बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है. ‘संघर्ष समिति’ बनाकर उन्होंने सरकार की उपेक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी के खिलाफ आवाज उठाई है. राजा विशाल का गढ़ से शुरू हुए इस अभियान में लोगों ने साफ कहा कि वैशाली का विकास नहीं हुआ, यहां अनैतिक गतिविधियां हो रही हैं. पर्यटकों के लिए शौचालय, पेयजल, ठहरने की व्यवस्था नहीं है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को परेशानी हो रही है.
संघर्ष की शुरुआत वैशाली स्थित ऐतिहासिक स्थल राजा विशाल का गढ़ से की गई, जहां लोगों ने विरासत बचाओ अभियान का एलान किया. समिति के सदस्यों ने साफ कहा कि वैशाली का जितना विकास होना चाहिए था, उतना अब तक नहीं हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस ऐतिहासिक स्थल पर न केवल उपेक्षा बरती गई है, बल्कि यहां अनैतिक गतिविधियां भी हो रही हैं, जो इसकी गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं. लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा पर्यटकों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है. न तो साफ-सफाई की उचित व्यवस्था है और न ही बुनियादी सुविधाएं जैसे शौचालय, पेयजल और ठहरने की व्यवस्था उपलब्ध है. इसका खामियाजा न सिर्फ बाहर से आने वाले पर्यटकों को, बल्कि स्थानीय लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है.
विरासत बचाओ अभियान के कहत आर-पार की लड़ाई
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि जहां राजगीर और बोधगया जैसे पर्यटन स्थलों का तेजी से विकास हुआ है, वहीं वैशाली को लगातार नजरअंदाज किया गया है. इस भेदभाव को लेकर लोगों में गहरा आक्रोश है. समिति के सदस्यों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि अब बहुत हो चुका है और वैशाली के अस्तित्व की लड़ाई अब स्थानीय लोग खुद लड़ेंगे. उन्होंने घोषणा की कि “विरासत बचाओ अभियान” के तहत अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी, जिसमें जन आंदोलन से लेकर राजनीतिक स्तर तक हर मंच पर आवाज उठाई जाएगी. वैशाली की ऐतिहासिक पहचान को बचाने के लिए शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक बड़े जनसंग्राम का रूप लेता नजर आ रहा है.
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