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गाजियाबाद। रईसपुर गांव की महिला किसान बबीता देवी का डेयरी उद्यम इन दिनों चर्चा में है। दो लाख रुपये के सीमित संसाधनों से शुरू हुआ उनका कारोबार अब सालाना 25 लाख रुपये से अधिक का हो चुका है। खास बात यह है कि इस मॉडल के जरिए उन्होंने गांव की 25 से 30 महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराया है। इससे अन्य महिलाओं में भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ावा मिला है।

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करीब 20 वर्ष पहले बबीता चौधरी ने घर के आंगन में डेयरी कार्य शुरू किया था। उस समय उनके पास केवल दो भैंस थीं। धीरे-धीरे उत्पादन और ग्राहकों की संख्या बढ़ने के साथ उन्होंने अपने काम का विस्तार किया। वर्तमान में उनके पास 50 से अधिक पशु हैं। बबीता ने दूध बिक्री तक सीमित न रहते हुए घी, दही, छाछ और देसी मिठाइयों का उत्पादन शुरू किया। मांग बढ़ने पर उन्होंने प्रोसेसिंग यूनिट को संगठित रूप दिया। इससे स्थानीय बाजार में गांव वाले ब्रांड से उनकी पहचान बनी। व्यवसाय को विस्तार देते हुए उन्होंने सरसों के तेल के लिए ऑयल एक्सपेलर प्लांट, आटा चक्की और मसाला प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित की। इससे आय के स्रोत बढ़े और कारोबार को स्थिरता मिली। यूनिट में वर्तमान में 25 से 30 महिलाएं कार्यरत हैं। ये महिलाएं उत्पादन और पैकेजिंग से जुड़े कार्य संभाल रही हैं। इससे गांव की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है और उनकी आय में वृद्धि हुई है। सभी महिलाओं को रोजगार के साथ-साथ काम करने का मौका भी मिला। महिलाओं को उचित मेहनताना भी दिया जाता है। बबीता ने बताया कि आने वाले कुछ महीनों में वह एक और मधु-पालन डेयरी भी चलाएंगी।

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