14 जून 1985 की इस घटना में यहां तक तो सब ठीक रहा. लेकिन, रोम से टेकऑफ होने के बाद जैसे ही प्लेन एक निश्चित ऊंचाई पर पहुंचा, अपनी सीट से दो शख्स खड़े हुए और कॉकपिट की तरफ बढ़ चले. ये दोनों वही शख्स थे, जो एथेंस से प्लेन में बोर्ड हुए थे और अपने साथ पिस्टल-हैंडग्रेनेड लाने में कामयाब रहे थे. इन दोनों को जब फ्लाइट सर्विस मैनेजर उली डेरिकसन रोकने की कोशिश की, तो दोनों ने उनकी बुरी तरह से पिटाई की और जबरन कॉकपिट में घुस गए.
कॉकपिट में दाखिल होने ही दोनों कैप्टन जॉन टेस्ट्रेक, फर्स्ट ऑफिसर फिल मारेस्का, फ्लाइट इंजीनियर क्रिश्चियन जिम्मरमैन पर हमला बोल दिया. तीनों को पिस्तौल की बट से पीटा गया. एक हमलावर ने पिस्तौल की नोक कैप्टन टेस्ट्रेक के सिर पर लगा दी और प्लेन हाईजैक करने की बात कही. इसने अपनी की पहचान हिज्बुल्लाह के लड़ाके मोहम्मद अली हम्मादी के तौर पर बताई. साथ ही, उसने प्लेन को रोम की जगह मिडिल ईस्ट ले जाने का फरमान सुना दिया.
- पायलट के पास प्लेन को रोम की जगह मिडिल ईस्ट की तरफ ले जाने के सिवाय कोई चारा नहीं था. लिहाजा, उसने प्लेन का रुख लेबनान के बेरूत इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरफ कर दिया.
- कुछ देर के उड़ान के बाद प्लेन लेबनान एयर ट्रैफिक कंट्रोल की जद में आ चुका था. पायलट ने बेरूत एयरपोर्ट के एटीसी से लैंडिंग की इजाजत मांगी, लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया.
- लैंडिंग की इजाजत को लेकर कैप्टन टेस्ट्रेक और एटीसी के बीच लंबी बहस हुई, वह हाईजैक प्लेन को अपने एयरपोर्ट पर उतरने की इजाजत नहीं देना चाहते थे.
- आखिर में, कैप्टन टेस्ट्रेक ने एटीसी को बताया कि हाइजैकर्स हैंडग्रेनेड का पिन निकालने को तैयार बैठे हैं. यदि बात नहीं मानी गई तो वे पूरा प्लेन बम से उड़ा देंगे.
- कैप्टन टेस्ट्रेक ने एटीसी से कहा – मैं फिर दोहराता हूं, हमें बेरूत में ही उतरना होगा. हमें बेरूत में ही उतरना होगा. कोई और विकल्प नहीं है.
- आखरिकार बेरूत एटीसी लैंडिंग की इजाजत देने के लिए तैयार हो गया. सुबह करीब 11:55 बजे प्लेन लेबनान के बेरूत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हो गया.
19 जिंदगियों के बदले मिला प्लेन के लिए फ्यूल
बेरूत एयरपोर्ट पर ट्रांस वर्ल्ड एयरलाइंस का यह प्लेन कई घंटे तक रुका. इस बीच, हाईजैकर्स ने अपनी डिमांड को लेकर कोई बात नहीं की. लंबे इंतजार के बाद हाईजैकर्स ने प्लेन को फ्यूल करने की मांग रखी, जिसे बेरूत एयरपोर्ट एडमिनिस्ट्रेशन ने नकार दिया. लंबी निगोशिएशन के बाद यह तय हुआ कि हाईजैकर्स फ्यूल के बदले 19 पैसेंजर्स को अपनी कैद से रिहा करेंगे. 19 पैसेंजर्स की रिहाई के साथ प्लेन में फ्यूल भर दिया गया. इसके बाद, यह हाईजैक प्लेन दोपहर करीब 1:30 बजे बेरूत एयरपोर्ट से टेकऑफ हो गया.
अल्जीरिया पहुंच हाईजैकर्स ने रखी अपनी मांगें
बेरूत से टेकऑफ होने के साथ हाईजैकर्स ने प्लेन को अल्जीरिया के अल्जीयर्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट ले जाने का फरमान सुना दिया. करीब दो घंटे की इस उड़ान में प्लेन भूमध्य सागर को पार किया और दोपहर करीब 3:30 बजे अल्जीयर्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हो गया. करीब पांच घंटे के इंतजार के बाद हाईजैकर्स ने अपनी डिमांड का खुलासा कर दिया. इन डिमांड्स को मानना अमेरिका और इजराइज के लिए आसान नहीं था.
क्या थीं प्लेन हाईजैकर्स की डिमांड्स
- 1983 में कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए बम धमाके करने वाले ‘कुवैत 17’ ग्रुप को रिहा किया जाए.
- इजराइल की एटलीट जेल में कैद 766 शिया मुसलमानों को रिहा किया जाए.
- दक्षिणी लेबनान में मौजूद इजराइली सेना की तत्काल वापसी हो.
- इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निंदा हो.
115 लोगों के साथ फिर टेकऑफ हुआ प्लेन
लंबे इंतजार के बावजूद जब हाईजैकर्स को अपनी डिमांड पर कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने अल्जीयर्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट से प्लेन टेकऑफ कराने का फैसला ले लिया. हालांकि इसके लिए उन्हें एक बार फिर फ्यूल की जरूरत थी. इस बार फ्यूल के एवज में 21 पैसेंजर्स की रिहाई पर बात बनी. 21 पैसेंजर्स की रिहाई के साथ प्लेन में फ्यूल कर भर दिया गया. जिसके बाद प्लेन 115 लोगों के साथ रात करीब 8:25 बजे टेकऑफ हो गया. प्लेन में मौजूद 115 लोगों में 105 पैसेंजर्स, 8 क्रू-मेंबर्स और 2 हाईजैकर्स शामिल थे.
बेरूत एयरपोर्ट पर इस्लामी मिलिशिया ने किया कब्जा
उस समय, लेबनान भी गृह युद्ध के दौर से गुजर रहा था. अब तक बेरूत पूरी तरह से शिया अमल मिलिशिया और हिज्बुल्लाह कब्जे में आ चुका था. चूंकि बेरूत इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक तरफ समुद्र से और दूसरी तरफ शिया इलाके से घिरा हुआ था, इसलिए इसकी पैरामीटर सिक्योरिटी नहीं थी. साथ ही, रिहायशी इलाके से सीधे रनवे पर गाड़ी चलाकर जाना मुमकिन था. इन खामियों का फायदा उठाते हुए एयरपोर्ट पर इस्लामी मिलिशिया का पूरी तरह से कब्जा हो गया.
फिर बेरूत पहुंच हाईजैकर्स ने शुरू की दरिंदगी
- हाईजैक प्लेन सुबह करीब 2:20 बजे एक बार फिर बेरूत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हो गया.
- बेरूत एयरपोर्ट पहुंचने के साथ हाईजैकर्स ने सभी सैनिक पैसेंजर्स बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया.
- हाईजैकर्स ने यूएस नेवी के रॉबर्ट स्टेथम को पहले बेरहमी से पीटा और फिर उसकी कनपटी में गोली मार दी.
- रॉबर्ट स्टेथन की हत्या के बाद उसका शव टरमैक पर फेंक दिया गया और फिर उसे दोबारा गोली मारी गई
- इसके बाद, सात ऐसे अमेरिकी पैसेंजर जिनके सरनेम यहूदी जैसे सुनाई देते थे, उन्हें प्लेन से उतार कर बेरूत की शिया जेल में कैद कर दिया गया.
- बेरूत एयरपोर्ट पर 12 अन्य आतंकी इस प्लेन में सवार हो गए और प्लेन सुबह करीब 5:40 बजे बेरूत से फिर से रवाना हो गया.
… और हाईजैकर्स ने रिहा कर दिए तीन पैसेंजर
सुबह 7:50 बजे हाईजैक प्लेन एक बार फिर अल्जीयर्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंच गया. अल्जीयर्स एयरपोर्ट पहुंचने वाले इस प्लेन में अब कुल 119 लोग थे. इनमें 97 पैसेंजर्स, 8 क्रू-मेंबर और 14 आतंकी शामिल थे. यह प्लेन अल्जीयर्स में अगले 25 घंटों तक रुका. इन 25 घंटों के घटनाक्रम में सबसे पहले हाईजैकर्स ने तीन अन्य पैसेंजर्स को प्लेन से रिहा किया. इसके बाद, अल्जीरियाई ऑफिशियल्स हाईजैकर्स के साथ बातचीत के लिए प्लेन में दाखिल हुए.
ग्रीक सरकार ने रिहा किया हाईजैकर्स का एक साथी
ग्रीक सरकार ने हाईजैकर्स के एक साथी अली अटवा को रिहा कर दिया. अली अटवा को स्पेशल फ्लाइट से अल्जीयर्स एयरपोर्ट लाया गया. अल्जीयर्स पहुंचने के बाद उसे प्लेन में मौजूद अन्य हाईजैकर्स को सौंप दिया गया. इसके बदले में हाईजैकर्स ने आठ ग्रीक नागरिकों को रिहा कर दिया, जिनमें लोकप्रिय ग्रीक गायक डेमिस रूसोस भी शामिल थे. इन लोगों को फिर ग्रीक सरकार के एक बिजनेस जेट से अल्जीयर्स से वापस एथेंस ले जाया गया.
क्या अल्जीरियाई ऑफिशियल्स और हाईजैकर्स के बीच बातचीत का कोई नतीजा निकल पाया?
अल्जीरियाई ऑफिशियल्स और हाईजैकर्स के बीच शुरू हुई बातचीत किसी अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंच सकी. हालांकि, इस बातचीत के दौरान हाईजैकर्स 58 बंधकों को रिहा करने के लिए राजी हो गए. इनमें 53 पैसेंजर और 5 महिला केबिन क्रू मेंबर शामिल थीं. अल्जीयर्स एयरपोर्ट से रवाना होने से पहले इन सभी 58 लोगों को रिहा कर दिया गया.
अल्जीयर्स एयरपोर्ट से टेकऑफ होने के बाद यह प्लेन कहां गया और उसमें अब कुल कितने पैसेंजर बचे थे?
तीसरे दिन यानी 16 जून 1985 की सुबह लगभग 8:45 बजे प्लेन अल्जीयर्स एयरपोर्ट से रवाना हुआ. इस प्लेन में अब कुल 54 लोग थे. इसमें 36 पैसेंजर्स, 3 क्रू मेंबर और 15 आतंकी शामिल थे. लैंडिंग के बाद, बाकी बचे 36 यात्रियों और 3 क्रू मेंबर्स को प्लेन से उतारकर बेरूत की एक शिया जेल में कर दिया गया. इस जेल में वे सात अमेरिकी पैसेंजर भी कैद थे, जिन्हें एक दिन पहले वहां लाया गया था.
यह हाइजैकिंग कुल कितने दिन तक चली और आखिर में इसका क्या नतीजा निकला?
अमल मिलिशिया के प्रमुख और लेबनान की टूटी हुई कैबिनेट में न्याय मंत्री नबीह बेरी ने हाईजैकर्स की ओर से बातचीत शुरू की. अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और लेबनानी अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद आखिरी 45 बंधकों को भी 30 जून को रिहा किया गया. इसके साथ, इजराइल की जेल में कैद लेबनानी कैदियों को भी रिहा कर दिया गया. 14 जून को शुरू हुआ हाईजैकिंग का यह घटनाक्रम कुल 17 दिनों तक चला.
क्या हाईजैकर्स की मांग मानते हुए इजराइल ने अपनी जेल में कैद 700 शिया कैदियों को रिहा किया?
रिहाई के बाद पैसेंजर्स को अमेरिकी वायु सेना के C-141B स्टारलिफ्टर कार्गो प्लेन से वेस्ट जर्मनी ले जाया गया. जहां अमेरिकी उपराष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश ने सभी से मुलाकात की. इसके बाद, उन्हें मैरीलैंड के एंड्रयूज एयर फोर्स बेस ले जाया गया, जहां राष्ट्रपति रीगन ने घर वापसी पर उनका स्वागत किया. इसके घटनाक्रम के बाद इजराइल ने 700 से ज्यादा शिया कैदियों को रिहा कर दिया.
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