पीलीभीत टाइगर रिजर्व का साप्ताहिक अवकाश होता है. अक्सर साप्ताहिक अवकाश के दिन पर्यटन गतिविधियां बंद रहती हैं, लेकिन टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इस दिन का सदुपयोग करने का बेहतरीन तरीका निकाला है. इससे दो बड़े फायदे होंगे पहला सामान्य पर्यटकों की भीड़ न होने के कारण बच्चे शांति से और बिना किसी हड़बड़ी के प्रकृति को करीब से देख सकेंगे. दूसरा साप्ताहिक अवकाश के दिन का ऐसा उपयोग वन्यजीव संरक्षण के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने में मील का पत्थर साबित होगा.
पीलीभीत: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन ने सामाजिक सरोकार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. अब जंगल की दहाड़ और प्रकृति की खूबसूरती सिर्फ पर्यटकों तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिले की बेटियां और दिव्यांग बच्चे भी इसका आनंद नि:शुल्क ले सकेंगे. प्रशासन की ओर से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं और दिव्यांग स्कूली बच्चों के लिए ‘दिव्य दर्शन’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई है.
15 मार्च से हो गया है शुरू
इस खास अभियान का शुभारंभ 15 मार्च से कर दिया गया है. कार्यक्रम के पहले चरण में बच्चों को टाइगर रिजर्व के भीतर ले जाकर वहां की जैव विविधता, वन्यजीवों और पर्यावरण के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया. बच्चों के लिए यह अनुभव किसी सपने के सच होने जैसा था, क्योंकि संसाधनों के अभाव में जो बच्चे जंगल की सैर नहीं कर पाते थे, उन्हें अब विभाग खुद अपनी गाड़ियों में बिठाकर सुरक्षित सफर करा रहा है. दिव्य दर्शन कार्यक्रम की सबसे दिलचस्प बात इसका समय है. आने वाले दिनों में यह सफारी हर बुधवार को आयोजित की जाएगी.
बच्चों को मिलेगा व्यवहारिक अनुभव
गौरतलब है कि बुधवार को पीलीभीत टाइगर रिजर्व का साप्ताहिक अवकाश होता है. अक्सर साप्ताहिक अवकाश के दिन पर्यटन गतिविधियां बंद रहती हैं, लेकिन टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इस दिन का सदुपयोग करने का बेहतरीन तरीका निकाला है. इससे दो बड़े फायदे होंगे पहला सामान्य पर्यटकों की भीड़ न होने के कारण बच्चे शांति से और बिना किसी हड़बड़ी के प्रकृति को करीब से देख सकेंगे. दूसरा साप्ताहिक अवकाश के दिन का ऐसा उपयोग वन्यजीव संरक्षण के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने में मील का पत्थर साबित होगा. लोकल 18 से बातचीत में पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर व्यावहारिक अनुभव देना है. जब ये बच्चे अपनी आंखों से बाघ, हिरण और दुर्लभ पक्षियों को देखेंगे, तो उनके मन में प्रकृति को बचाने की भावना और प्रबल होगी.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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