उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके परिवार के लिए बेहद कठिन है, लेकिन वे हरीश के सर्वोत्तम हित में निर्णय चाहते हैं। साथ ही उम्मीद जताई कि न्यायालय के इस आदेश से भविष्य में ऐसे अन्य परिवारों को भी मानवीय व्यवहार और सहानुभूति के साथ राहत मिल सकेगी।
अदालत के आदेश लागू करने में लापरवाही का आरोप
अशोक राणा ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार अदालत के आदेश के बाद भी उन्हें लागू करने में लापरवाही की जाती है। इससे आम लोगों को परेशान होना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अदालत आदेश करती है, लेकिन प्रदेश सरकार लागू नहीं कराती। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने फिजियोथेरेपिस्ट और नर्स की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया था, लेकिन वह सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। यह भी बताया कि गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ के सीएमओ व डॉक्टरों की टीम ने जांच की बात कही थी, लेकिन उन्होंने एम्स के डॉक्टरों के पैनल से ही जांच कराने की मांग की थी।
फीडिंग ट्यूब से दिया जा रहा जीवनरक्षक उपचार
हरीश को वर्तमान में परक्यूटेनियस एंडोस्कोपिक गैस्ट्रोस्टोमी (पीईजी) ट्यूब के माध्यम से जीवनरक्षक उपचार दिया जा रहा है। अदालत के आदेश के बाद इसे बंद कर दिया जाएगा। उन्हें उपशामक व आरामदेह देखभाल दी जाएगी, ताकि प्रकृति अपना कार्य कर सके। इसके लिए हरीश को दिल्ली स्थित एम्स ले जाया जाएगा।
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