-जिलाधिकारी, जीडीए वीसी और नगर आयुक्त ने परिवार से मिलकर जानी परिस्थितियां
-जन सहयोग से ढाई लाख रुपये की तत्काल मदद, मुख्यमंत्री विवेक राहत कोष से भी मिलेगी सहायता
-परिवार को स्वरोजगार के लिए दुकान आवंटन और सरकारी योजनाओं का दिलाया जाएगा लाभ
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एम्पायर सोसाइटी में रहने वाले हरीश राणा के परिवार की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार बुधवार को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक स्वयं परिवार के आवास पर पहुंचे और उनसे मुलाकात कर हालात की जानकारी ली। राजनगर एक्सटेंशन स्थित फ्लैट संख्या ए-एम-1314 की 13वीं मंजिल पर रहने वाले अशोक राणा और उनके परिवार की स्थिति को समझने के लिए अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से विस्तार से बातचीत की और उन्हें हर संभव सहायता का भरोसा दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस दौरान परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा कि शासन उनके साथ खड़ा है और उनकी हर संभव मदद की जाएगी। जानकारी के अनुसार यह परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले का रहने वाला है। परिवार के मुखिया अशोक राणा वर्ष 1989 से फरवरी 2021 तक नई दिल्ली स्थित आईजीआई एयरपोर्ट के एक निजी होटल में कार्यरत रहे। सेवा निवृत्ति के बाद उन्हें सीमित पेंशन प्राप्त हो रही है। वर्तमान में वे घर पर खाद्य सामग्री तैयार कर उसे बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
परिवार में तीन संतान हैं। एक पुत्र गुरुग्राम में निजी नौकरी करता है, जबकि दूसरा पुत्र हरीश राणा पिछले लगभग 13 वर्षों से कोमा में है। हरीश राणा की लंबी बीमारी और लगातार इलाज के कारण परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से कठिन दौर से गुजर रहा है। परिवार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में इच्छा मृत्यु के लिए भी याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ अनुमति प्रदान की है। परिवार की एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है और वह गाजियाबाद में ही निवास कर रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने परिवार की स्थिति को गंभीरता से सुना और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोडऩे का आश्वासन दिया।
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़ ने बताया कि तत्काल सहायता के रूप में जन सहयोग से परिवार को ढाई लाख रुपये की आर्थिक मदद उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री विवेक राहत कोष से भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि परिवार को स्थायी आजीविका का साधन उपलब्ध कराने के लिए स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ा जाएगा। इसके तहत उन्हें दुकान आवंटित कर रोजगार का अवसर दिया जाएगा, ताकि वे सम्मानजनक तरीके से अपना जीवन यापन कर सकें। प्रशासन की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि परिवार को शासन द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके। अधिकारियों ने बताया कि परिवार को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, आर्थिक सहायता और अन्य सरकारी योजनाओं से जोडऩे की प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाएगी।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक और जीडीए उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल ने भी परिवार को भरोसा दिलाया कि नगर निगम और विकास प्राधिकरण स्तर पर जो भी संभव सहायता होगी, वह उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि इस कठिन समय में प्रशासन परिवार के साथ खड़ा है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और परिवार को आर्थिक सहायता, रोजगार और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि इस परिवार को स्थायी सहारा मिले और वे आने वाले समय में आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
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