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रमज़ान का महीना शुरू होते ही गोरखपुर में सहरी और इफ्तार के खास व्यंजनों की रौनक बढ़ जाती है. सहरी में सेवई, दूध, दही और फल जैसे हल्के भोजन पसंद किए जाते हैं, जबकि इफ्तार में उबले चने, सलाद, फल और ठंडे शरबत लोगों की पहली पसंद बन जाते हैं. इसके साथ ही शाम होते ही बाजारों में भी खास खाने-पीने की चीजों की चहल-पहल दिखाई देने लगती है.

गोरखपुर. रमज़ान का महीना आते ही शहर की रौनक भी बदल जाती है, पूरे एक महीने तक रोज़ा रखने वाले लोग सुबह सहरी से लेकर शाम की इफ्तारी तक खान-पान के खास नियमों का पालन करते हैं. इस दौरान बाजारों में भी कई ऐसी खास खाने की चीजें दिखाई देती हैं, जो आम दिनों में कम ही नजर आती हैं. यही वजह है कि रमज़ान सिर्फ इबादत का ही नहीं बल्कि खास स्वाद और परंपराओं का भी महीना माना जाता है. रोज़ा रखने वाले लोग सुबह सहरी के समय ऐसा खाना पसंद करते हैं जो पूरे दिन शरीर को ऊर्जा दे सके. साथ हि कई बार लोग खाने में दही का भी इस्तेमाल करते हैं, ताकि गला सुखे ना और प्यास ना लगे. वही कई घरों में इस समय सेवई, दूध, रोटी, दही और हल्के फल खाए जाते हैं. सेवई को खास तौर पर मीठे दूध के साथ बनाया जाता है, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और पेट भी हल्का रहता है. इसके साथ ही खजूर और केला जैसे फल भी सहरी की थाली का हिस्सा होते हैं.

इफ्तार में खास चने और सलाद का स्वाद
शाम को रोज़ा खोलने का समय यानी इफ्तार सबसे खास माना जाता है. इस समय बाजारों में एक खास तरह का उबला हुआ चना खूब बिकता है. रोज़ा रखने वाले राजू बताते हैं कि, इफ्तार के समय यह चना बेहद पसंद किया जाता है, इसे उबालकर उसमें प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, नींबू और मसाले डालकर सलाद की तरह तैयार किया जाता है. इसका स्वाद बेहद अलग होता है और यह शरीर को तुरंत ताकत भी देता है. रमज़ान के दौरान फलों की बिक्री भी काफी बढ़ जाती है. तरबूज, खरबूजा, केला और सेब जैसे मीठे फल इफ्तार की थाली में जरूर शामिल होते हैं. इसके अलावा शरबत, रूहे-अफज़ा और ठंडे पेय भी लोग काफी पसंद करते हैं. गर्मी के मौसम में ये चीजें शरीर को ठंडक देने का काम करती हैं.

रमज़ान में बाजारों की बदलती तस्वीर
जैसे ही रमज़ान शुरू होता है, शाम के समय बाजारों की रौनक बढ़ जाती है. इफ्तार से पहले लोग खास खाने की चीजें खरीदने के लिए दुकानों और ठेलों पर पहुंचते हैं. चना, फल, सेवई और अलग-अलग तरह के स्नैक्स की दुकानें इस समय खास तौर पर सजाई जाती हैं. रमज़ान का महीना सिर्फ इबादत और रोज़े का ही नहीं बल्कि खास स्वाद और पारंपरिक खान-पान का भी महीना है. सहरी से लेकर इफ्तार तक खाने की अलग-अलग वैरायटी इस पूरे महीने को और भी खास बना देती है.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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