-सीईओ कृष्णा करुणेश का नया प्लान, सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी
-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान या सरकारी एजेंसी करेगी गुणवत्ता की जांच
-मानकों पर खरी उतरने पर ही जारी होगा भुगतान, अनियमितताओं पर तय होगी जिम्मेदारी
उदय भूमि संवाददाता
नोएडा। नोएडा अथॉरिटी के सीईओ कृष्णा करुणेश हर मोर्चे पर जुटे हैं। सड़क, बिजली, पानी आदि व्यवस्थाओं को सुधारने में लगे हैं। सड़कों की खराब हालत और निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सीईओ ने कड़ा रुख अपनाया है। अब शहर में बनने वाली सड़कों और गलियों के निर्माण कार्य का पूरा भुगतान तभी किया जाएगा, जब उनकी गुणवत्ता की जांच किसी स्वतंत्र सरकारी एजेंसी से कराई जाएगी और वह मानकों पर खरी पाए जाएंगी।
प्राधिकरण की ओर से जारी नए निर्देशों के अनुसार सड़क निर्माण से जुड़े सभी कार्यों की थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य कर दी गई है। इसके तहत सड़कों की गुणवत्ता की जांच केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) या किसी अन्य सरकारी तकनीकी एजेंसी से कराई जाएगी। जांच में संतोषजनक रिपोर्ट मिलने के बाद ही संबंधित ठेकेदार को भुगतान जारी किया जाएगा। प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में शहर के कई इलाकों में बनी सड़कों के दो से तीन साल के भीतर ही टूटने की शिकायतें सामने आई हैं। कई जगहों पर गड्ढे बन गए हैं और सड़कों की सतह उखड़ने लगी है। इससे न केवल आम लोगों को परेशानी हो रही है, बल्कि प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे थे। अब तक प्राधिकरण अपने स्तर पर ही निर्माण कार्यों की जांच कराता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत स्वतंत्र तकनीकी संस्थान से जांच कराना अनिवार्य होगा।
इससे निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता, मोटाई, डिजाइन और तकनीकी मानकों की सही तरीके से जांच हो सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाना और भ्रष्टाचार पर रोक लगाना है। थर्ड पार्टी जांच से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि ठेकेदार निर्धारित मानकों के अनुसार ही निर्माण कार्य करें। प्राधिकरण के सीईओ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सड़क निर्माण से जुड़े सभी नए और चल रहे कार्यों में इस व्यवस्था का पालन कराया जाए। साथ ही जहां सड़कें समय से पहले खराब हुई हैं, वहां संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से शहर में बनने वाली सड़कों की गुणवत्ता में सुधार आएगा और लोगों को लंबे समय तक बेहतर सड़क सुविधा मिल सकेगी। साथ ही निर्माण कार्यों में जवाबदेही भी तय हो सकेगी, जिससे भविष्य में सड़कों की बदहाली की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
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