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होमworldअमेरिका से युद्ध के बीच ईरान ने भारत को कहा शुक्रिया, आखिर क्या हुआ ऐसा?

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Iran-India Relation: ईरान-अमेरिका के बीच जो युद्ध चल रहा है, उसकी आंच कहीं नहीं साउथ एशिया तक पहुंच रही है. अमेरिका ने एक ईरानी शिप को उसकी घर वापसी के रास्ते में मार गिराया. इसके बाद भारत ने एक और ईरानी जहाज को अपने घर में शरण दी है. इसकी वजह से ईरान ने युद्ध के बीच में भारत को शुक्रिया कहा है.

अमेरिका से युद्ध के बीच ईरान ने भारत को कहा शुक्रिया, आखिर क्या हुआ ऐसा?Zoom

एस. जयशंकर.

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच ईरान ने भारत का शुक्रिया अदा किया है. इससे पहले दोनों देशों को लेकर कूटनीतिक सवाल तब उठे थे, जब ईरान के युद्धपोत को अमेरिका ने समंदर में मार गिराया था. IRIS डेना नाम का ये युद्धपोत भारत के मिलान कार्यक्रम के तहत एक्सरसाइज के लिए आया था. जब वो वापसी के रास्ते में श्रीलंका के गेला के पास पहुंचा, तो अमेरिका ने इसे अपना निशाना बना दिया. इसके तुरंत बाद ईरान ने अपने युद्धपोत IRIS लवन को कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति मांगी, जिसे भारत ने तुरंत स्वीकार कर लिया.

भारत की इस मदद को लेकर ईरान ने भारत के प्रति आभार व्यक्त किया है. ईरान ने भारत के इस कदम को मानवीय बताया है. देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान इस घटना के बारे में जानकारी दी. पश्चिम एशिया संघर्ष में बदलते हालात पर राज्यसभा में जयशंकर ने कहा कि मौजूदा हालात में ईरान के साथ उच्च स्तरीय संपर्क बनाए रखना मुश्किल रहा है, हालांकि मौजूद चैनलों के जरिए डिप्लोमेटिक बातचीत जारी है.

ईरान ने क्यों कहा भारत को शुक्रिया

विदेश मंत्री ने कहा – ‘हालांकि कोशिशें की गई हैं, लेकिन इस समय नेतृत्व के स्तर पर ईरान के साथ संपर्क करना साफ तौर पर मुश्किल है. मैंने 20 फरवरी, 2026 और 5 मार्च, 2026 को विदेश मंत्री अराघची से बात की है. हम आने वाले दिनों में ये उच्च स्तरीय बातचीत जारी रखेंगे.’ इस दौरान उन्होंने कोच्चि में अभी डॉक किए गए ईरानी नेवी के जहाज का भी जिक्र किया. विदेश मंत्री ने उन हालातों के बारे में बताया जिनके तहत भारत ने जहाज को भारतीय पोर्ट में आने की इजाजत दी थी. जयशंकर ने कहा-

‘ईरानी पक्ष ने 20 फरवरी, 2026 को इस इलाके के तीन जहाजों को हमारे पोर्ट पर डॉक करने की इजाजत मांगी थी. यह 1 मार्च, 2026 को मिल गई. IRIS लवन असल में 4 मार्च, 2026 को कोच्चि में डॉक हुआ. क्रू अभी भारतीय नौसेना फैसिलिटी में है. हमारा मानना ​​है कि यह करना सही है. ईरानी विदेश मंत्री ने इस इंसानियत भरे काम के लिए हमारे देश का शुक्रिया अदा किया है.’

श्रीलंका के पास डूबा था ईरानी युद्धपोत

यह तब हुआ जब श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत IRIS डेना के डूबने की घटना घटी. लगभग उसी समय एक और ईरानी नौसेना का जहाज इस इलाके में काम करते समय तकनीकी दिक्कतों का सामना करने के बाद मदद मांगने के लिए भारत से संपर्क कर चुका था. विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में चल रही अस्थिरता के बीच भारत की एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़ी चिंताओं पर भी बात की और कहा कि हालात को मैनेज करते हुए सरकार ने भारतीय कंज्यूमर्स के हितों को सबसे जरूरी प्राथमिकता के तौर पर रखा है. विदेश मंत्री ने कहा कि सबसे पहले, भारत शांति के पक्ष में है और बातचीत और डिप्लोमेसी पर लौटने की अपील करता है. हम तनाव कम करने, संयम बरतने और आम लोगों की सुरक्षा पक्का करने की वकालत करते हैं. राज्यसभा में अपने संबोधन के आखिर में जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार सहित हमारा राष्ट्रीय हित हमेशा सबसे ऊपर रहेगा.

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Prateeti Pandey

News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें

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