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बसंतकालीन गन्ने की भरपूर पैदावार के लिए बीज की गुणवत्ता और उसका सही उपचार सबसे जरूरी है. लोकल 18 से शाहजहांपुर कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात डॉ. एनपी गुप्ता बताते हैं कि बेहतर जमाव सुनिश्चित करने के लिए किसानों को स्वस्थ नर्सरी से बीज चुनना चाहिए और बुवाई से पहले फफूंदनाशक घोल से उपचारित करना चाहिए. सही नमी और वैज्ञानिक विधि से की गई बुवाई अंकुरण प्रतिशत को बढ़ाकर बंपर उत्पादन की नींव रखती है. बेहतर जमाव के लिए हमेशा 10 से 12 महीने पुराने स्वस्थ गन्ने का ही चुनाव करें. गन्ने की बुवाई के लिए दो या तीन आंखों वाले टुकड़ों का उपयोग करें.
बेहतर जमाव के लिए हमेशा 10 से 12 महीने पुराने स्वस्थ गन्ने का ही चुनाव करें. ध्यान रहे कि गन्ना रोगग्रस्त न हो और उस पर लाल सड़न (Red Rot) या उकठा जैसे रोगों के लक्षण न हों. बीज के लिए गन्ने के ऊपरी एक-तिहाई भाग का उपयोग करना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इसमें ग्लूकोज की मात्रा अधिक होती है, जो त्वरित अंकुरण में सहायक होती है.
गन्ने की बुवाई के लिए दो या तीन आंखों वाले टुकड़ों का उपयोग करें. कटाई करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि गन्ने की ‘आंख’ (Bud) को कोई नुकसान न पहुंचे. कटे हुए टुकड़ों का सिरा साफ होना चाहिए. अगर आप हाथ से कटाई कर रहे हैं, तो तेज धार वाले औजार का प्रयोग करें ताकि गन्ने के रेशे न फटें, जिससे संक्रमण का खतरा कम रहता है.
बुवाई से ठीक पहले बीज शोधन करना अत्यंत जरूरी है. इसके लिए 100 लीटर पानी में 200 ग्राम कार्बेंडाजिम मिलाकर घोल तैयार करें और गन्ने के टुकड़ों को 10-15 मिनट तक इसमें डुबोकर रखें. यह प्रक्रिया मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों और फफूंद से बीज की रक्षा करती है. शोधन के बाद बीज को छाया में सुखाकर तुरंत बुवाई के लिए खेत में ले जाएं.
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गन्ने के बेहतर जमाव के लिए खेत में पर्याप्त नमी का होना जरूरी है. पलेवा करके मिट्टी को भुरभुरा होने तक जोतें. भारी मिट्टी में जमाव थोड़ा कठिन होता है, इसलिए जैविक खाद या गोबर की खाद का भरपूर उपयोग करें. यदि मिट्टी सूखी है, तो बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करना फायदेमंद रहता है, ताकि आंखों को नमी मिल सके और अंकुरण शुरू हो जाए.
बसंतकालीन गन्ने की बुवाई के लिए ट्रेंच विधि या सामान्य कूंड़ विधि अपनाई जा सकती है. टुकड़ों को कूंड़ में रखते समय ध्यान रखें कि वे एक-दूसरे से सटे न हों. बुवाई की गहराई 5 से 7 सेंटीमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए. अधिक गहराई में बीज दबाने से ऑक्सीजन की कमी के कारण अंकुरण में देरी होती है और जमाव प्रतिशत गिर जाता है.
जमाव के दौरान दीमक और मिट्टी के कीटों से बचाव के लिए कूंड़ों में फिप्रोनिल या क्लोरपायरीफॉस का छिड़काव करना चाहिए. इसके साथ ही फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय ही दे देनी चाहिए. नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा आधार खुराक के रूप में दें. पोषक तत्वों का सही संतुलन शुरुआती जड़ों के विकास को गति प्रदान करता है, जिससे पौधा स्वस्थ निकलता है.
बुवाई के बाद कूंड़ों को हल्की मिट्टी से ढकें और उसे ज्यादा न दबाएं. यदि बुवाई के 15-20 दिनों के भीतर मिट्टी की ऊपरी सतह सख्त हो जाए, तो हल्की गुड़ाई कर दें. इससे मिट्टी में हवा का संचार बढ़ता है और अंकुर आसानी से बाहर निकल आते हैं. याद रखें, बेहतर जमाव ही आधी सफलता है, इसलिए शुरुआती 40 दिनों तक विशेष निगरानी रखें.
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