हिंदी सिनेमा के वो दिग्गज एक्टर जिनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि सपनों को सच करने की कोई उम्र नहीं होती है. अगर आंखों में आसमान छूने की ख्वाहिश है तो आप किसी भी उम्र में अपने सपनों को अपनी हकीकत बना सकते हैं. ये एक्टर बोमन ईरानी हैं. बोमन ईरानी ने 41 साल की उम्र में फिल्म ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ से एक्टिंग डेब्यू किया था.
नई दिल्ली.बोमन ईरानी ने आंखों में सपने लिए 41 साल की उम्र में अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी. आज वो बॉलीवुड के सबसे सफल और मंझे हुए कलाकारों में गिने जाते हैं. डेब्यू फिल्म ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ की रिलीज का किस्सा साझा करते हुए उन्होंने कहा था कि वो थिएटर्स के बाहर खड़े थे ताकि वो देख सकें कि लोग उन्हें पहचान रहे हैं या नहीं.
बहुत कम लोग जानते हैं कि अभिनय की दुनिया में आने से पहले बोमन ईरानी ने बिल्कुल अलग राह चुनी थी. उन्होंने मुंबई के मीठीबाई कॉलेज से वेटर का कोर्स किया था, जिसके बाद उन्हें प्रतिष्ठित ताज पैलेस में काम करने का मौका मिला. वहां वह रूम सर्विस और मेहमानों की देखभाल से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाते थे.
बोमन ईरानी के जीवन में एक बड़ा झटका आया जब उनके पिता का निधन हो गया. इस कठिन समय में बोमन ने अपनी मां जेरबानू का साथ दिया और परिवार की जिम्मेदारी संभाली. उन्होंने साउथ मुंबई के ग्रांट रोड इलाके में स्थित परिवार की छोटी-सी वेफर दुकान ‘गोल्डन वेफर्स’ चलाने में मां की मदद की.
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एक्टर बोमन ईरानी की शुरुआती जिंदगी काफी सारे उतार-चढ़ाव से गुजरी थी. पिता के गुजर जाने के बाद एक्टर आर्थिक चुनौतियां और बढ़ती जिम्मेदारियां के बोझ के तले दब गए थे, लेकिन ईरानी में मुश्किलों के बावजूद उनके में आगे बढ़ने की काबिलियत थी.
एक्टर की मां ने ही उनकी परवरिश की थी. मां ने बेकरी चलाई, कर्ज संभाले और बच्चों को कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी. उनकी हिम्मत और शांत स्वभाव ने छोटे बोमन पर गहरा असर डाला. इन शुरुआती सालों ने उन्हें अनुशासन, धैर्य और मेहनत की इज्जत करना सिखाया, जो आगे चलकर उनके जीवन और काम के तरीके में झलकने लगा.
बोमन ईरानी का बचपन भी कई मुश्किलों से भरा रहा. वह डिस्लेक्सिया, गहरी घबराहट और हकलाने जैसी समस्याओं से जूझते थे, जिसके कारण लोगों से खुलकर बातचीत करना उनके लिए आसान नहीं था. अपने विचारों को सामने रखना अक्सर उन्हें डराने वाला अनुभव लगता था और आत्मविश्वास धीरे-धीरे विकसित हुआ.
परिवार की वेफर की दुकान संभालने के दौरान बोमन ईरानी ने जिंदगी के कई व्यावहारिक सबक सीखे, लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने अपनी रचनात्मक रुचियों को भी तलाशना शुरू किया. इसी दौरान उन्हें फोटोग्राफी में दिलचस्पी हुई और वह स्कूल के कार्यक्रमों और स्टेज परफॉर्मेंस की तस्वीरें खींचने लगे. ऐसी ही एक परफॉर्मेंस मशहूर कोरियोग्राफर श्यामक दावर की भी थी.
‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ से करियर की शुरुआत के बाद बोमन ईरानी ‘वीर-जारा’, ‘मैं हूं ना’, ‘लक्ष्य’, ‘नो एंट्री’, ‘लगे रहो मुन्ना भाई’, ‘डॉन’, ‘खोसला का घोंसला’, ‘हे बेबी’ और ‘दोस्ताना’ जैसी फिल्मों में नजर आए. 2009 में उन्होंने ‘3 इडियट्स’ में प्रिंसिपल वीरू सहस्त्रबुद्धे यानी ‘वायरस’ का किरदार निभाया, जो डरावना भी था और मानवीय भी.
आमिर खान के साथ काम करते हुए उनकी शानदार एक्टिंग को खूब सराहा गया और ये उनके करियर के सबसे यादगार रोल्स में से एक बन गया. अगले दशक में उनकी फिल्मों की लिस्ट और लंबी हुई, जिसमें ‘हाउसफुल’, ‘डॉन 2’, ‘हाउसफुल 2’, ‘कॉकटेल’, ‘जॉली एलएलबी’, ‘पीके’, ‘हैप्पी न्यू ईयर’, ‘दिलवाले’, ‘हाउसफुल 3’, ‘संजू’, ‘टोटल धमाल’, ’83’, ‘ऊंचाई’ और ‘डंकी’ शामिल हैं.
100 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके बोमन ईरानी आज अपने दम पर करोड़ों का साम्राज्य बना चुके हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एक्टर की नेटवर्थ करीबन 107 करोड़ रुपए के आसपास है.
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