राजधानी के सराय काले खां स्थित मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब को राष्ट्रीय स्तर की एक और बड़ी पहचान मिलने जा रही है। दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) कॉरिडोर का दिल्ली टर्मिनल यहीं प्रस्तावित है। इसके मद्देनजर सराय काले खां के प्रभाव क्षेत्र योजना में संशोधन की तैयारी शुरू कर दी गई है ताकि प्रस्तावित हाई-स्पीड रेलवे स्टेशन का समुचित एकीकरण सुनिश्चित किया जा सके।
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने प्रस्तावित स्टेशन, मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन और संभावित यात्री संख्या से जुड़े आंकड़े उच्च स्तरीय समिति के साथ साझा किए हैं। हालांकि पिछली बैठक में कॉरिडोर को केंद्र सरकार की औपचारिक स्वीकृति नहीं मिली थी, इसलिए इसे प्रभाव क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया था। अब योजना में संशोधन कर इसे शामिल किया जाएगा।
दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित सात नई हाई-स्पीड रेल लाइनों में शामिल है। लगभग 813 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दिल्ली को उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और लखनऊ से जोड़ेगा। वर्तमान में यह मार्ग देश के सबसे व्यस्त रेल रूट में गिना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री आवाजाही करते हैं।
धार्मिक पर्यटन (काशी और प्रयागराज), शैक्षणिक गतिविधियां (प्रमुख विश्वविद्यालय और संस्थान) और व्यापारिक आवागमन की भारी यात्री दबाव इस रूट को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। रेलवे बोर्ड ने एनएचएसआरसीएल को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को संशोधित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित हाई-स्पीड स्टेशन सराय काले खां बस अड्डे और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के आसपास विकसित किया जाएगा, जिससे मौजूदा परिवहन ढांचे के साथ बेहतर तालमेल बैठाया जा सके।
देश का सबसे बड़ा ट्रांजिट प्वाइंट बनेगा सराय काले खां…
सराय काले खां पहले से ही राजधानी का सबसे व्यस्त और रणनीतिक ट्रांजिट केंद्र है, जहां एक ही परिसर में दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन, इंटरस्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी), रेलवे स्टेशन और नमो भारत स्टेशन मौजूद हैं। यह वह बिंदु है जहां रोजाना हजारों यात्री बस, मेट्रो और रेल के बीच निर्बाध रूप से आवागमन करते हैं। अब प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल स्टेशन जुड़ने के बाद सराय काले खां न केवल दिल्ली, बल्कि देश के परिवहन मानचित्र पर सबसे बड़े मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब बनेगा। मेट्रो, रेल, नमो भारत, अंतरराज्यीय बस सेवा और बुलेट ट्रेन इन सभी का एक ही स्थान पर एकीकृत होना इसे राष्ट्रीय स्तर का प्रमुख परिवहन जंक्शन बना देगा, जिससे यात्रियों को सहज कनेक्टिविटी और तेज आवागमन की सुविधा मिलेगी।
ट्रैफिक दबाव कम करने की व्यापक तैयारी…
सराय काले खां क्षेत्र में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए प्रभाव क्षेत्र योजना और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) योजना के तहत बहुस्तरीय सुधार कार्य भी प्रस्तावित किए गए हैं। योजना के अनुसार इंटरस्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) के आसपास की सड़कों का चौड़ीकरण किया जाएगा ताकि बसों, निजी वाहनों और सार्वजनिक परिवहन की आवाजाही अधिक सुव्यवस्थित हो सके। मौजूदा सीएनजी स्टेशन का पुनर्विकास कर उसके स्थान और यातायात प्रभाव का पुनर्संतुलन किया जाएगा, जिससे जाम की स्थिति कम हो। इसके साथ ही एक नई ट्रैफिक सर्कुलेशन योजना तैयार की जा रही है, जिसमें वाहनों के प्रवेश और निकास मार्गों को अलग-अलग कर भीड़ को नियंत्रित करने का प्रावधान होगा। दीर्घकालिक दृष्टि से रिंग रोड फ्लाईओवर को बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर तक विस्तारित करने की योजना भी है, जो इस पूरे क्षेत्र को वैकल्पिक और तेज मार्ग उपलब्ध कराएगी।
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