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किसानों की फसलों में खरपतवार, रोग और कीट अक्सर भारी नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे उपज में 15–20% तक कमी आ सकती है. अब किसानों को इन समस्याओं के समाधान के लिए कहीं भटकने की जरूरत नहीं है. सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली के तहत किसान घर बैठे ही फसल संबंधी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं.
अमेठी.अकसर किसान अपनी फसलों में मेहनत तो करते हैं लेकिन खरपतवार और रोग और किट उनकी फसलों को तबाह करके उनकी मेहनत पर पानी फिर देते हैं. ऐसे में आपके फसल में रोग लगे या कोई किट उन्हें परेशान करें तो किसान की साल भर की मेहनत और उनकी गाड़ी कमाई खराब हो जाती है. ऐसे में किसानों को अब घर बैठे फसलों की रोग किट की समस्या सहित और भी समस्याओं से निजात आसानी से मिलेगी. खास बात यह है कि किसानों के फसलों में रोग की समस्या हो या फिर उनकी फसल में कोई किट ने अपना कब्जा कर लिया हो सभी समस्याओं का निस्तारण आप किसानों को घर बैठे मिलेगा. किसान इसके लिए जारी नंबर जिसमें फसल में कीट या रोग संबंधी समस्या के निदान के लिए सहभागी फसल निगरानी एवं निदान प्रणाली के मोबाइल नंबर 9452247111 एवं 9452257111 पर SMS/WhatsApp के माध्यम से समस्या का विवरण या पौधे की फोटो भेजकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. किसानों को समाधान की सूचना 48 घंटे के भीतर उपलब्ध करा दी जाएगी.
समाधान के लिए दिया गया है नंबर
जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि फसल बुवाई के बाद खेतों में तेजी से उगने वाले विभिन्न प्रकार के खरपतवार फसल की वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, जिससे उपज में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. उन्होंने बताया कि संकरी पत्ती वाले खरपतवार जैसे गेहूंसा, जंगली जई आदि के नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत WG (13.5 ग्राम सक्रिय तत्व + 500 मि.ली. साल्वेंट) अथवा फिनोक्साप्राप-पी-ईथाइल 10 प्रतिशत EC की 400 मि.ली. मात्रा को 150–200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव किया जाए. चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार जैसे बथुआ, सैजी, कृष्णनील, सत्यानाशी, जंगली गाजर आदि के नियंत्रण के लिए मेटसल्फ्यूरान मिथाइल 20 प्रतिशत WP (8 ग्राम सक्रिय तत्व + 200 मि.ली. साल्वेंट) अथवा 2,4-D सोडियम साल्ट 80 प्रतिशत की 250 ग्राम मात्रा का उपयोग करने की सलाह दी गई है. इनका छिड़काव सिंचाई के बाद किया जाए. दोनों प्रकार के खरपतवारों के संयुक्त नियंत्रण हेतु सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रतिशत + मेटसल्फ्यूरान मिथाइल 5 प्रतिशत WG की 16 ग्राम मात्रा बुवाई के 25–30 दिन बाद प्रति एकड़ 150–200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने कहा कि कोई भी किसान जारी नंबर पर भी शिकायत और समस्या का समाधान कर सकते हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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