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नई दिल्ली. संयमित आक्रामकता और तकनीकी श्रेष्ठता का वह संगम, जो अक्सर रोहित शर्मा और विराट कोहली की पारियों में दिखाई देता है, वो  में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में संजू सैमसन के बल्ले से देखने को मिला वेस्टइंडीज़ के विरुद्ध खेली गई उनकी ‘चांसलेस’ पारी ने न केवल प्रशंसकों का दिल जीता, बल्कि क्रिकेट दिग्गजों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या भारतीय क्रिकेट को अपना नया ‘मिस्टर कंसिस्टेंट’ मिल गया है.  इस पारी की सबसे बड़ी विशेषता वह अनुशासन था, जो संजू की पिछली पारियों में अक्सर गायब रहता था.

यदि वह रोहित की ग्रेस और विराट के टेम्परामेंट का यह संतुलन बनाए रखते हैं, तो आगामी विश्व कप में वह भारतीय टीम के सबसे घातक हथियार साबित होंगे. कोलकाता के मैदान ने एक बार फिर गवाही दी कि जब संजू अपनी लय में होते हैं, तो क्रिकेट की दुनिया में उनसे सुंदर बल्लेबाजी करने वाला शायद ही कोई और हो.

रोहित की नज़ाकत और विराट का अनुशासन

संजू सैमसन की इस पारी को ‘आधा रोहित और आधा विराट’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि उन्होंने दोनों दिग्गजों की सर्वश्रेष्ठ खूबियों को एक साथ पिरोया.  पारी की शुरुआत में जब उन्होंने टाइमिंग के साथ बाउंड्रीज़ निकालीं, तो उसमें रोहित शर्मा जैसी सहजता नज़र आई.  गेंद बल्ले पर आते ही जिस तरह से बाउंड्री की सैर कर रही थी, वह शुद्ध ‘रोहित क्लास’ था. वहीं दूसरी ओर, पारी के मध्य में जब रन गति को बनाए रखते हुए विकेट बचाने की चुनौती थी, तब संजू ने विराट कोहली जैसा अनुशासन दिखाया.  उन्होंने जोखिम भरे बड़े शॉट्स के बजाय स्ट्राइक रोटेशन और गैप्स ढूंढने पर ध्यान केंद्रित किया.

12 से 19 ओवर का मास्टरक्लास: नो रिस्क, हाई रिवॉर्ड

इस पारी का सबसे अविश्वसनीय और चर्चा का विषय वह टाइम था् , जो 12वें ओवर से शुरू होकर 19वें ओवर तक चला.  आम तौर पर टी20 क्रिकेट में यह वह समय होता है जब बल्लेबाज ‘करो या मरो’ की स्थिति में होता है और हवा में शॉट खेलकर जोखिम उठाता है लेकिन संजू ने यहाँ एक अलग ही रणनीति अपनाई
हवा में कोई शॉट नहीं: संजू ने 12 से 19 ओवर के बीच एक भी शॉट हवा में नहीं खेला। उन्होंने गेंद को ज़मीन के साथ सटाकर रखने का फैसला किया, जिससे आउट होने की संभावना शून्य  हो गई.
गैप्स की जादुई तलाश: बिना जोखिम लिए भी रन गति कम नहीं हुई उन्होंने अपनी कलाईयों का इस्तेमाल कर फील्डर्स के बीच से गेंद को निकाला. यह एक ऐसी परिपक्वता थी जो दिग्गज खिलाड़ियों की पहचान होती है. कैलकुलेटेड रिस्क: उन्होंने दिखाया कि बाउंड्री लगाने के लिए हर बार गेंद को स्टैंड्स में पहुँचाना ज़रूरी नहीं है. क्लासिक कवर्स ड्राइव और फ्लिक के ज़रिए उन्होंने वेस्टइंडीज़ के गेंदबाजों को बेबस कर दिया.

क्यों खास थी यह ‘चांसलेस’ पारी?

संजू सैमसन के करियर पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि वह अपनी शुरुआत को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर पाते या गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेलकर विकेट फेंक देते हैं लेकिन कोलकाता में उन्होंने इन सभी आलोचनाओं को शांत कर दिया यह पारी ‘चांसलेस’ थी क्योंकि पूरे समय में कैच का कोई मौका नहीं बना, कोई एलीमेंट ऑफ लक (Luck) शामिल नहीं था; यह पूरी तरह से कौशल और दिमागी खेल का प्रदर्शन था.

वेस्टइंडीज़ के खिलाफ यह पारी संजू सैमसन के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है.  12 से 19 ओवर के बीच का वह संयम यह बताता है कि संजू अब केवल एक ‘टैलेंटेड’ खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक ‘मैच विनर’ में तब्दील हो चुके हैं.

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