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ईरान और इजराइल के बीच युद्ध चल रहा है. ईरान के मुखिया खामेनेई की इस लड़ाई में मौत हो गई है. धीरे-धीरे वैश्विक तनाव देखा जा रहा है. ऐसे में यह जंग कब तक चलेगी इस बारे में ज्योतिष पंडित प्रवीन शर्मा का कहना है कि वर्तमान समय में ‘रौद्र’ नामक संवत्सर चल रहा है और इसके बाद ‘कालयुक्त’ संवत्सर आने वाला है. उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में ग्रहों की स्थिति के कारण ‘अंगारक दोष’ बन रहा है इस दौरान सूर्य, राहु और मंगल की स्थिति को ज्योतिष में उग्र माना जाता है.

अयोध्या: ईरान-इजराइल में युद्ध, खामेनेई की मौत, क्यों बढ़ रहा वैश्विक तनाव? कब तक चलेगी यह जंग? ज्योतिष से जानें
अयोध्या: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और इज़रायल के बीच जारी संघर्ष को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है. कई देशों की नजरें इस टकराव पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर वैश्विक शांति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी पड़ सकता है. इस बीच ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस युद्ध को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आ रहे हैं. ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह युद्ध दुनिया के लिए किस तरह खतरे की घंटी बन सकती है. ग्रह नक्षत्र की छाल के हिसाब से यह युद्ध कब तक चल सकता है तो चलिए इस रिपोर्ट पर विस्तार से समझते हैं.

रामनगरी अयोध्या के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित प्रवीन शर्मा का कहना है कि वर्तमान समय में ‘रौद्र’ नामक संवत्सर चल रहा है और इसके बाद ‘कालयुक्त’ संवत्सर आने वाला है. भारतीय पंचांग और ज्योतिषीय गणना के आधार पर ऐसे संघर्षों की संभावनाओं का संकेत पहले से ही बताया जाता रहा है. उनका कहना है कि पंचांग में भी वैश्विक स्तर पर संघर्ष और अस्थिरता के संकेत मिलते हैं.

ग्रहण का रहता है विशेष प्रभाव
ज्योतिषाचार्य के अनुसार सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का एक ही पक्ष में होना कई बार बड़े वैश्विक घटनाक्रमों की ओर संकेत करता है. भले ही सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया, लेकिन जिन देशों में यह दिखाई दिया है. वहां युद्ध या तनाव जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना बढ़ जाती है. वहीं आने वाला चंद्र ग्रहण भारत में आंशिक रूप से दिखाई देगा, जिसका कुछ सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है.

जुलाई अगस्त तक चलेगा युद्ध
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में ग्रहों की स्थिति के कारण ‘अंगारक दोष’ बन रहा है इस दौरान सूर्य, राहु और मंगल की स्थिति को ज्योतिष में उग्र माना जाता है. ऐसी स्थिति में देशों के बीच तनाव, सैन्य गतिविधियां और संघर्ष बढ़ने की संभावना रहती है. ग्रहों की चाल के अनुसार अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच तनाव की स्थिति जुलाई-अगस्त तक बनी रह सकती है.

भारत पर भी पड़ेगा प्रभाव
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले संवत्सर के स्वामी बृहस्पति होंगे, जिन्हें ज्योतिष में संरक्षण और संतुलन का ग्रह माना जाता है ऐसे में भारत पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है. भले ही चंद्र ग्रहण के कारण देश में कुछ मानसिक मतभेद या सामाजिक हलचल देखने को मिले, लेकिन सरकार हालात को नियंत्रित करने में सक्षम रहेगी.

विश्व में पड़ेगा प्रभाव
ज्योतिषाचार्य के अनुसार आने वाले महीनों में दुनिया के कई हिस्सों में घटनाएं और तनाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन ग्रहों की स्थिति के चलते भारत पर इसका बड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है.

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