ब्रज में चारों ओर होली की धूम है। गोकुल में रविवार को छड़ीमार होली खेली गई। दुल्हन की तरह सजी महिलाओं ने भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के बाल स्वरूप को रंग लगाया। घूंघट में गोपियों ने भगवान पर गोटेदार कपड़ों से लिपटी छड़ियां बरसाईं। गोपियों ने बड़ी संख्या में पहुंचे विदेशी सैलानियों पर भी दनादन छड़ियां बरसाईं। पुलिसवालों को भी नहीं छोड़ा। उन्हें देखकर लोग चिल्लाते हुए बोल रहे थे- और मारो, और मारो। बलदेव विधानसभा के बीजेपी विधायक पूरन प्रकाश ने राधा-कृष्ण बने कलाकारों संग डांस किया। इससे पहले, नंदभवन से दोपहर 12.30 बजे भगवान श्रीकृष्ण का डोला निकला। इस पर कन्हैया और बलराम के बाल स्वरूप सवार थे। लोग रंग-गुलाल उड़ाते हुए डोले के आगे-पीछे चलते दिखे। रास्ते में जगह-जगह यात्रा का स्वागत किया गया। फूल, रंग और अबीर बरसाए गए। चौराहों पर बड़े-बड़े स्टेज तैयार किए गए। उन पर महिलाएं सज-धजकर डांस करते दिखीं। गलियों में होली के गीत और ‘जय राधे, जय कृष्णा’ के भजन गूंजते रहे। इससे पहले, नंदगांव में गुरुवार (26 फरवरी) को लट्ठमार होली खेली गई थी। सजी-धजी राधारानी की सखियों ने बरसाना से आए हुरियारों पर लट्ठ बरसाए थे। बुधवार (25 फरवरी) को बरसाना में लट्ठमार होली खेली गई थी। तब नंदगांव से गए श्रीकृष्ण के सखाओं पर बरसाना की सखियों ने जमकर लाठी बरसाई थीं। मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव में लट्ठमार होली होती है। लेकिन गोकुल में छड़ीमार होली का प्रचलन सदियों पुराना है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने यहां बाल लीलाएं की थीं। लोगों को मारने के लिए जो छड़ी तैयार की जाती है, उस पर गोटेदार कपड़ा लपेटा जाता है। इससे भगवान श्रीकृष्ण-बलराम को चोट नहीं लगती है। छड़ीमार होली की तस्वीरें देखिए… गोकुल की छड़ीमार होली से जुड़े अपडेट्स जानने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
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