मध्य प्रदेश का चीता प्रोजेक्ट इस समय चर्चा में बना हुआ है, जहां विधानसभा में सरकार की तरफ से चीतों के भोजन के खर्च के बारे में जानकारी दी गई है. विधानसभा में कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने सरकार से तीखे सवाल पूछे, जिस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जवाब दिया. अभी मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
सांकेतिक तस्वीर AI
हर दिन 35000 रुपए चीतों को खिलाने पर हो रहे खर्च
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधानसभा में जवाब देते हुए बताया कि चीतों के भोजन के लिए बजट में कोई भी अलग से इंतजाम नहीं है. इसके अलावा वन्यजीव प्रबंधन की राशि से ही इनका भुगतान होता है. सरकार की तरफ से बताया गया है कि बकरे का मीट खरीदने के लिए कुल 1,27,10,870 रुपए खर्च किए गए हैं. अगर इसे 365 दिनों में बांटे, तो औसतन करीब 35000 रुपए प्रतिदिन होता है. यह भी बताया गया है कि चीतों को कितने बकरे दिए जाएंगे. इसका कोई भी मानक तय नहीं है और यह पूरी तरह से चीतों की जरूरत पर निर्भर करता है.
अभी श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में 35 बड़े जीते हैं. सरकार की तरफ से बताया गया है कि एक खास टीम 24 घंटों के लिए चीतों की मॉनिटरिंग कर रही है और 6 दिसंबर को हुई तेंदुए की मौत का भोजन की कमी से कोई मतलब नहीं है. उसकी मौत एक सड़क दुर्घटना में हुई थी. यह भी बताया गया है कि कभी-कभी चीते खुले में घूमते हुए ग्रामीण इलाकों में पहुंच जाते हैं, जहां वह मवेशियों का शिकार करते हैं.
PM मोदी ने कूनो नेशनल पार्क में चीतों को छोड़ा
श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्वास परियोजना की शुरुआत की गई थी. इसके बाद साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 8 चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था. फिर 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को भारत लाया गया था. कूनो नेशनल पार्क में कई चीतों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद शावकों के जन्म के चलते वर्तमान में चीतों की संख्या बढ़ी है.
साउथ अफ्रीका से आने वाले हैं चीते
इसके बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ऐलान करते हुए बताया था कि एमपी में साउथ अफ्रीका के बोत्सवाना से 8 चीते आने वाले हैं. तब उन्होंने वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की थी और कहा था कि इससे चीता परियोजना को गति मिलेगी.
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