बक्शीपुर, तैयारी करने वालों की पहली पसंद
गोरखपुर का बक्शीपुर बाजार पुस्तक प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है. यहां दर्जन भर से अधिक पुस्तक दुकानों की कतारें हैं. 90 के दशक से लेकर आज तक की लगभग हर तरह की किताब यहां उपलब्ध हो जाती है. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, स्कूल-कॉलेज की पाठ्यपुस्तकें, सामान्य ज्ञान, शोध सामग्री और दुर्लभ संस्करण तक यहां आसानी से मिल जाते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर किताब का नाम पता हो तो बक्शीपुर में उसे ढूंढना मुश्किल नहीं. यही वजह है कि यह बाजार वर्षों से छात्रों और अभ्यर्थियों की पहली पसंद बना हुआ है.
किताबों की खुशबू और पुराने दौर का एहसास
बक्शीपुर की दुकानों का अपना अलग अंदाज है. पुरानी लकड़ी की अलमारियां, ऊंची-ऊंची रैक और पन्नों की सरसराहट यहां के माहौल को खास बनाती है. किताबों की खुशबू जैसे बीते समय की याद दिलाती है. यहां आने वाले कई लोग बताते हैं कि वे सिर्फ किताब खरीदने ही नहीं, बल्कि उस अनुभव को महसूस करने भी आते हैं, जो डिजिटल दौर में धीरे-धीरे कम होता जा रहा है.
कचहरी रोड, बस स्टैंड के पास ज्ञान की गलियां
बस स्टैंड के पास स्थित कचहरी रोड भी पुस्तक बाजार के रूप में प्रसिद्ध है. यहां कई पुरानी और प्रतिष्ठित पुस्तक दुकानें मौजूद हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं. सरकारी नौकरी, बैंकिंग, रेलवे, एसएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी किताबें, गाइड और प्रश्नपत्र यहां आसानी से मिल जाते हैं. कई ऐसे युवा जो आज प्रशासनिक या अन्य उच्च पदों पर कार्यरत हैं, उन्होंने अपनी तैयारी की शुरुआत इन्हीं दुकानों से की थी.
घंटाघर बाजार, उर्दू अदब का खजाना
गोरखपुर के घंटाघर बाजार में एक पुरानी पुस्तक दुकान साहित्य प्रेमियों के लिए खास आकर्षण है. इसे सैयद अशरफ अली संचालित करते हैं, जो इस दुकान की तीसरी पीढ़ी हैं. बीए करने के बाद से ही उन्होंने इस विरासत की जिम्मेदारी संभाल ली. इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत उर्दू साहित्य का विशाल संग्रह है. यहां रामधारी सिंह दिनकर, मिर्ज़ा ग़ालिब, मीर तकी मीर और अमीर खुसरो जैसे महान रचनाकारों की पुस्तकें उपलब्ध हैं. शायरी, डॉक्यूमेंट्री और दुर्लभ किताबों के लिए लोग विशेष रूप से यहां आते हैं.
ज्ञान की परंपरा को संजोए बाजार
गोरखपुर के ये बाजार केवल किताबों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं हैं. ये स्थान पीढ़ियों से ज्ञान और संस्कृति को संजोए रखने वाले केंद्र बन चुके हैं. यहां की रौनक इस बात का प्रमाण है कि शहर में पढ़ने और सीखने की परंपरा आज भी जीवित है. डिजिटल युग में भी इन बाजारों की अहमियत कम नहीं हुई है, बल्कि समय के साथ इनका महत्व और बढ़ा है.
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