कहा जाता है कि कई बार ऐसा करने के बाद झांसी में अच्छी बारिश हुई. इसी वजह से लोगों की आस्था और भी मजबूत हो गई. स्थानीय बुजुर्ग और मंदिर के पुजारियों का दावा है कि यह परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है. पहले के लोग भी सूखे के समय यही उपाय करते थे. गांव के लोग मिलकर तालाब या बड़े बर्तन में पानी भरर पूरे विधि विधान से शिवलिंग को उस पानी में रख देते है. इस दौरान भजन कीर्तन होता है और सभी लोग भगवान से अच्छी बारिश की प्रार्थना करते है.
कहा जाता है कि कई बार ऐसा करने के बाद झांसी में अच्छी बारिश हुई. इसी वजह से लोगों की आस्था और भी मजबूत हो गई. स्थानीय बुजुर्ग और मंदिर के पुजारियों का दावा है कि यह परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है. पहले के लोग भी सूखे के समय यही उपाय करते थे. गांव के लोग मिलकर तालाब या बड़े बर्तन में पानी भरर पूरे विधि विधान से शिवलिंग को उस पानी में रख देते है. इस दौरान भजन कीर्तन होता है और सभी लोग भगवान से अच्छी बारिश की प्रार्थना करते है. लोगों का मानना है कि भगवान शिव जल के देव भी माने जाते है. प्रकृति को संतुलित रखते है.
जब धरती पर सूखा पड़ता है तब यह परंपरा भगवान को याद दिलाने का एक तरीका माना जाता है. इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए आसपास के सैकड़ो की संख्या मे भी लोग आते है. मंदिर में उस दिन खास भीड़ रहती है. महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग सभी मिलकर पूजा में शामिल होते हैं. भले ही विज्ञान अपनी जगह सही है. लेकिन लोगों की आस्था अपनी जगह है. झांसी का यह सिद्धश्वर मंदिर आज भी लोगों के विश्वास का बड़ा केंद्र बना हुआ है. बारिश हो या न हो लेकिन भगवान शिव के प्रति लोगों की धार्मिक आस्था लगातार बढ़ती जा रही है.
झांसी घूमने आने वाले शिव भक्त इस मंदिर के बारे में सुनते हैं तो यहां दर्शन करने के लिए जरूर आते हैं. शिव भक्तों का भी विश्वास है कि सुख के संकट काल में इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग हमेशा से संकट हरण करता चला आ रहा है.
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