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Agra Taj Mahal News: ताजमहल निर्माण के दौरान उसे सालों तक सुरक्षित रखा जा सके इसे लेकर उसकी नींव बेहद मजबूत बनाई गई थी. ताजमहल के नीचे एक ऐसी खास लकड़ी लगाई गई है जो ताजमहल को मजबूती प्रदान करती है. ये ऐसी लकड़ी है, जितना पानी में रहेगी उतना मजबूत बनेगी.

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा को ताजनगरी भी कहा जाता है. यहां स्थित ताजमहल की खूबसूरती और उसकी नक्कासी देखने देश-विदेश से प्रतिदिन हजारों पर्यटक आगरा आते है. ताजमहल का निर्माण आज से कई सालों पहले मुगलकाल में हुआ था. उस दौड़ में आज की तरह इंजीनियर या अत्याधुनिक मशीनें नहीं हुआ करती थीं. इसके बावजूद ताजमहल को इतना खूबसूरत और मजबूत बनाया है कि हर कोई इसकी कारीगरी की तारीफ करता है.

यह है कुछ खास

  • ताजमहल आगरा के यमुना किनारे बना हुआ है.
  • ताजमहल का निर्माण सन् 1632 में शुरू हुआ.
  • सन् 1653 में बनकर तैयार हुआ.
  • निर्माण में करीब 22 सालों का समय लगा.
  • ताजमहल मुगल सम्राट शाहजहां ने पत्नी मुमताज की याद में बनवाया था.
  • करीब 20 हजार से अधिक कारीगरों ने इसका निर्माण किया था.
  • हर एक बारीकियों का विशेष ध्यान रखा गया था.

… तो ढह गया होता ताज
ताजमहल निर्माण के दौरान उसे सालों तक सुरक्षित रखा जा सके इसे लेकर उसकी नींव बेहद मजबूत बनाई गई थी. ताजमहल के नीचे एक ऐसी खास लकड़ी लगाई गई है जो ताजमहल को मजबूती प्रदान करती है. ये ऐसी लकड़ी है, जितना पानी में रहेगी उतना मजबूत बनेगी. यही कारण था कि ताजमहल के ढांचे के नीचे इसे लगाया गया था. इस लकड़ी का नाम आबनूस है. यदि ये लकड़ी उस समय नहीं लगाई जाती तो शायद आज ताजमहल ढह गया होता और वर्तमान में हम इस खूबसूरत इमारत का दीदार नहीं कर पाते. ये अबनूस की लकड़ी इतनी मजबूत है कि प्राकृतिक आपदा से भी ताजमहल की ईमारत को सुरक्षित रखती है.

क्या बोले इतिहासकार?
आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार अनुराग पालीवाल ने बताया कि ताजमहल के ढांचे को तैयार करने से पहले एक खास तरह की लकड़ी का इस्तेमाल किया गया था. उन्होंने कहा कि उस दौर में कुशल कारीगरों की कमी नहीं थी, साधन कम थे. फिर भी कारीगरों की इंजीनियरिंग काम आती थी. इतिहासकार ने बताया कि ताजमहल निर्माण के दौरान उसके नीचे नींव में अबनूस की लकड़ी को लगाया गया था. अबनूस एक ऐसी अद्धभुत लड़की है जो जितनी नमी में रहेगी उतनी मजबूत बनेगी. उन्होंने कहा कि वैसे अन्य लकड़ियां पानी में फूल जाती हैं, लेकिन अबनूस की लकड़ी नमी में और अधिक मजबूत होती है.

उन्होंने यह भी कहा कि इसीलिए ताजमहल को यमुना के किनारे बनाया गया था, जहां की मिट्टी नमी वाली थी. इस पर एक बेहद भारी इमारत को सुरक्षित रखने के लिए, सबसे पहले कुएं खोदकर उन्हें पत्थर, मलबे और विशेष प्रकार की लकड़ी जिसका नाम है अबनूस से भरा गया था. यदि उस दौर में अबनूस की लकड़ी को नहीं लगाया जाता तो शायद ताजमहल इतना मजबूत नहीं होता. उन्होंने कहा कि शायद वर्तमान में ताजमहल देखने के लिए होता ही नहीं.

इतिहासकार अनुराग पालीवाल ने कहा कि बादशाह शाहजहां जानते थे कि यह खूबसूरत इमारत आने वाले समय में एक मिशाल पेश करेगी. यही कारण था कि उन्होंने ताजमहल की खूबसूरती की हर एक बारीकी का ध्यान रखा और उसे इतना मजबूत बनाया कि वह सालों साल तक जीवित रहे. हालांकि वर्तमान में अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा समय समय पर ताजमहल की मरम्मत की जाती रहती है. लेकिन जो भी ताजमहल देखने आता है और ज़ब इसके इतिहास के बारे में सुनता है तो हैरान रह जाता है कि आखिर किस तरह से 17वीं सदी ने इसका निर्माण कराया गया होगा जो आज भी इतना मजबूत है.

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काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें

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