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2. सुनील गावस्कर: “स्पेशलिस्ट गेंदबाजों की अहमियत समझें”
(स्पोर्ट्स टुडे और ब्रॉडकास्टिंग चैनल्स पर चर्चा के दौरान)

गावस्कर ने स्पष्ट किया कि ऑलराउंडर विकल्प तभी काम आते हैं जब मुख्य विभाग यानी बैटिंग या बॉलिंग अपना काम कर रहे हों. “8वें या 9वें नंबर तक बल्लेबाजी की तलाश में हम अपने मुख्य मैच-विनर्स को खो रहे हैं. कुलदीप यादव का रिकॉर्ड शानदार है, उन्हें बाहर बिठाना समझ से परे है. चेन्नई में आपको प्रॉपर स्पिनर्स की जरूरत होगी.”

3. आकाश चोपड़ा: “मैचअप के फेर में फंसी टीम”
(अपने यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया विश्लेषण में)

चोपड़ा ने ‘बाएं हाथ के बल्लेबाज के सामने ऑफ-स्पिनर’ मैचअप वाली थ्योरी की आलोचना की. “अक्षर पटेल फॉर्म में थे, उन्हें सिर्फ ‘मैचअप’ के कारण बाहर करना गलत था. क्रिकेट स्किल का खेल है. चेन्नई और कोलकाता जैसी पिचों पर भारत को कुलदीप, वरुण और अक्षर की ‘स्पिन-त्रिमूर्ति’ के साथ जाना चाहिए, भले ही एक तेज गेंदबाज कम करना पड़े.”

4. इरफान पठान: “विनिंग कॉम्बिनेशन से छेड़छाड़ भारी पड़ी”
(सोशल मीडिया और न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर मैच के बाद का विश्लेषण)

पठान के अनुसार, वॉशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल के बीच चयन में फॉर्म को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी. “अक्षर पटेल लगातार विकेट निकाल रहे थे. उन्हें बाहर करने से टीम का संतुलन बिगड़ गया. सुंदर एक अच्छे विकल्प हैं, लेकिन अक्षर का हालिया प्रभाव बहुत ज्यादा था. अगले मैचों में हमें विकेट लेने वाले विकल्पों की तरफ वापस जाना होगा.”

पूर्व क्रिकेटर, के. श्रीकांत का मानना है कि चेपॉक की लाल मिट्टी पर ‘मिस्ट्री’ से ज्यादा ‘टर्न’ काम करेगी. यहां कुलदीप यादव सबसे घातक होंगे क्योंकि उन्हें हवा में ड्रिफ्ट मिलता है.

अगले मैचों में इन स्पिनर की सबसे ज्यादा डिमांड

1. कुलदीप यादव, सबसे ज्यादा डिमांड

क्यों: सुनील गावस्कर और संजय मांजरेकर दोनों का मानना है कि कुलदीप एक ‘विशुद्ध विकेट-टेकर’ हैं. चेन्नई की धीमी पिच पर, जहां गेंद ग्रिप करती है, कुलदीप की गुगली और हवा में दी गई फ्लाइट किसी भी बल्लेबाज को छकाने के लिए काफी है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि उन्हें बाहर रखना रणनीतिक भूल थी.

कुलदीप यादव और अक्षर पटेल की जगह अर्शदीप सिंह और वॉशिंगटन सुंदर को मौका मिला.

2. अक्षर पटेल, फॉर्म के आधार पर

क्यों: इरफान पठान और आकाश चोपड़ा का तर्क है कि अक्षर पटेल बेहतरीन फॉर्म में थे और लगातार विकेट ले रहे थे. उन्हें सिर्फ ‘मैचअप’ (बाएं हाथ के बल्लेबाज के सामने ऑफ-स्पिनर लाने की जिद) के चक्कर में बाहर नहीं करना चाहिए था. चेन्नई और कोलकाता जैसी पिचों पर अक्षर का कंट्रोल और सटीक लाइन-लेंथ रनों पर अंकुश लगाने के साथ विकेट भी दिलाती है.

अक्षर पटेल.

3. वरुण चक्रवर्ती, पिच और मिस्ट्री के लिए

क्यों: चेन्नई वरुण का घरेलू मैदान है और कोलकाता (ईडन गार्डन्स) में वह आईपीएल के दौरान काफी सफल रहे हैं. आकाश चोपड़ा के अनुसार, कोलकाता की पिच पर, जहां गेंद स्किड करती है, वरुण की तेज गति वाली स्पिन और ‘कैरम बॉल’ सबसे ज्यादा असरदार होगी.

Washington Sundar

सुपर-8 मैच में सिर्फ 11 रन बनाकर आउट हुए सुंदर

‘विकेट-टेकर’ की जरूरत
साउथ अफ्रीका के खिलाफ मैच में टीम इंडिया मिडिल ओवर्स में विकेट नहीं निकाल पाई. एक्सपर्ट्स का मानना है कि वरुण और कुलदीप जब साथ गेंदबाजी करते हैं, तो विकेट गिरने के चांस बढ़ जाते हैं. अक्षर पटेल इस अटैक को वह मजबूती देते हैं जिससे विपक्षी टीम पर रनों का दबाव बना रहता है.

चेन्नई की पिच पर स्पिन-त्रिमूर्ति का ‘पुख्ता’ रिकॉर्ड
1. कुलदीप यादव: टर्न और विकेट का संगम

आंकड़े: कुलदीप ने चेन्नई में खेले गए वनडे मैचों में अब तक 9 विकेट चटकाए हैं. इसमें 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार स्पेल और 2023 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 10 ओवर में केवल 42 रन देकर 2 विकेट (मैक्सवेल और वॉर्नर जैसे बड़े विकेट) शामिल हैं.

खासियत: उनका इकॉनमी रेट यहां 4.80 के आसपास रहता है, जो चेन्नई की पिचों पर उन्हें बेहद घातक बनाता है.

2. वरुण चक्रवर्ती: चेपॉक का ‘रहस्यमयी’ जाल

आंकड़े: चेन्नई में आईपीएल और घरेलू मैचों में वरुण का इकॉनमी रेट 6.50 से 7.00 के बीच रहा है. चेपॉक में खेले गए मैचों में उन्होंने लगभग 1.2 विकेट प्रति मैच की औसत से सफलता हासिल की है.

खासियत: यहां की लाल मिट्टी वाली पिच पर उनकी गेंद 105-110 किमी/घंटा की रफ्तार से स्किड करती है, जिससे बल्लेबाजों को कट या पुल शॉट खेलने का समय नहीं मिलता.

3. अक्षर पटेल: सटीक और किफायती

आंकड़े: चेन्नई में खेले गए टेस्ट मैच में अक्षर ने एक मैच में 5 विकेट लेने का कारनामा किया है. सीमित ओवरों में यहां उनका इकॉनमी रेट 6.00 से भी कम रहता है.

खासियत: चेन्नई की पिच पर जहां गेंद नीची रहती है, अक्षर की 90% गेंदें स्टंप्स की लाइन में होती हैं, जिससे एलबीडब्ल्यू होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है.

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