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फर्रुखाबाद: गुलाब की खेती सही योजना से की जाए तो यह सालभर अच्छा मुनाफा दे सकती है. ऐसे में फर्रुखाबाद के किसानों ने गुलाब की खेती करके बदली अपनी किस्मत बदल रहे हैं. किसान अब परंपरागत खेती को छोड़कर गुलाब का फूल उगा रहे हैं. जिस प्रकार कम लागत में प्रति महीने बंपर कमाई हो रही है.

किसान जो की पिछले 25 वर्षों से गुलाब की खेती करते आ रहे हैं. मात्र तीन बीघा में हजारों रुपए की कमाई हो रही है. शादियों के सीजन में फूलों की डिमांड रहती है तो वहीं फूलों की बिक्री खेतों से हो जा रही है. शादियों में जयमाला स्टेज, दूल्हे की गाड़ी और दुल्हन के लिए फूलों की चादर तैयार करते हैं. जिस प्रकार फूलों से गुलदस्ता और माला व पूजा में प्रयोग किया जाता है. यही कारण है कि गुलाब की फसल ने किसानो के जीवन में बहार ला दी है.

फायदे की है खेती

खेत में कार्य करने वाले अन्य किसान ने बताया कि वह पिछले 15 वर्षों से अपने खेत में कर रहे हैं. गुलाब की फसल इससे उन्हें कम लागत में ही हो जाता है हजारों रुपए का लाभ. जिस प्रकार मात्र तीन बीघा में ही गुलाब की खेती शुरू की है. इसके बावजूद भी इस समय पर वह अच्छी खासी कमाई करते नजर आ रहे हैं. आमतौर पर इसमें खाद और दवा नाम मात्र की ही पड़ती है. तो दूसरी ओर फूलों की अत्यधिक बिक्री भी इनके पास हो जाती है. यही कारण है कि महीने में 50 से 60 हजार रुपए का लाभ हो जाता है.

कम लागत में होती है बंपर कमाई

गुलाब की खेती जो दस हजार रुपए प्रति 1 बीघा की लागत से तैयार होने वाली इस फसल से 200 रुपए प्रति किलो गुलाब की बिक्री होती है. वही इन दिनों में 15 से 20 किलो गुलाब तैयार हो जाता है. आज के समय में डिमांड इतनी है कि गुलाब की फसल तैयार होते ही खेत से ही हो जाती है बिक्री. वही यहां पर आकर खरीददार करते हैं फूलों की खरीद और जिले भर में करते हैं बिक्री. फर्रुखाबाद क्षेत्र में इन दिनों पारंपरिक फसलों के साथ-साथ गुलाब की खेती किसानों के लिए मुनाफे का नया जरिया बनती जा रही है। किसान अब केवल फूल बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इत्र, गुलकंद, सजावटी मालाएं और शादी की वरमालाएं तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं.

ऐसे करें गुलाब की खेती

एक बीघा में लगभग 8 से 10 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं, जिनसे सालाना 25 से 30 क्विंटल तक उत्पादन संभव है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान फूलों का वैल्यू एडिशन करें तो सालाना 6 से 7 लाख रुपये तक की कुल बिक्री संभव है.खर्च निकालने के बाद 4 से 5 लाख रुपये तक शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता है.

गुलकंद और मिठाई उद्योग में गुलाब की पंखुड़ियों की मांग वर्षभर बनी रहती है, जबकि शादियों के सीजन में मालाओं और सजावट के लिए कीमतें और बढ़ जाती हैं. वहीं इत्र और गुलाब जल के लिए भी बाजार स्थिर और लाभकारी माना जा रहा है. किसानों के अनुसार सही किस्म का चयन, उचित सिंचाई और बाजार से सीधा संपर्क किसानों की आय को दोगुना करने में सहायक सिद्ध हो सकता है. इस प्रकार गुलाब की खेती अब केवल सुगंध ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने का माध्यम बन रही है.

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