बांदा में शुरू हुआ कालिंजर महोत्सव तीन दिन तक चला, जिसमें देश-विदेश से पर्यटक पहुंचे. कालिंजर दुर्ग परिसर में लगे स्टॉलों पर हस्तशिल्प, पत्थर नक्काशी और बुंदेली उत्पादों की जमकर बिक्री हुई. क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी आरके रावत के अनुसार तीन दिनों में करीब एक करोड़ रुपये का व्यापार हुआ, जिससे स्थानीय रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिला.
महोत्सव में जमकर बिके ये सामान
जानकारी के लिए बता दें कि इस 15 से 17 फरवरी तक चले इस महोत्सव में स्थानीय व्यापारियों का काफी अच्छा व्यापार हुआ है. इस महोत्सव में यहां छोटे व्यापारियों, स्वयं सहायता समूहों और कारीगरों को निःशुल्क या रियायती दरों पर स्टॉल उपलब्ध कराए गए थे. इसमें हस्तशिल्प वस्तुएं, लकड़ी के पारंपरिक खिलौने, पत्थर पर नक्काशी, बुंदेली मिठाइयां, देसी मसाले और लोकल उत्पादों की जमकर बिक्री हुई हैं, जिसको लेकर व्यापारियों में भी काफी उत्साह देखने को मिलना है और उनकी मांग है कि ऐसा महोत्सव साल में एक बार जरूर होना चाहिए जो हमारे रोजगार को भी आगे बढ़ाएं.
अधिकारी बोले तीन दिन में एक करोड़ का व्यापार
वही इस संबंध में क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी आरके के रावत ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि हम लोगों ने मेले के समापन के बाद जब व्यापारियों से व्यापार के संबंध में बात की तो यह अंदाजा लगाया गया कि इस 3 दिन के मेले में लगभग एक करोड़ रुपए का व्यापार हुआ है. यह एक साधारण महोत्सव नहीं रहा है.इसने पर्यटन स्थल कालिंजर दुर्ग को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई है.व्यापक प्रचार-प्रसार से लाखों की भीड़ आकर्षित हुई थी. जिससे क्षेत्र के आर्थिक और सांस्कृतिक विकास को गति मिली. तीन दिन तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे, यह महोत्सव सिर्फ व्यापारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसने कालिंजर को महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में भी दुनिया के सामने लाने का काम किया. उन्होंने बताया कि इस बार हुई 26 जनवरी की परेड में भी कालिंजर महोत्सव का स्टैचू वहां दिखाया भी गया था.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें
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