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Pali Ground Report News: पाली जिले के सोमेसर कस्बे का बूसी गांव आज भी बुनियादी सुविधा से वंचित है. सुमेर नदी के पार बसे करीब 200 परिवार हर मानसून में भारी परेशानी झेलते हैं. बारिश के दिनों में नदी उफान पर होती है, जिससे 3 से 4 महीने तक गांव का संपर्क कट जाता है और लोग घरों में कैद होकर रह जाते हैं. बच्चों को स्कूल जाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ती है. कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने और गुहार लगाने के बावजूद जब समाधान नहीं हुआ, तो ग्रामीणों ने जनसहयोग से खुद पुलिया निर्माण का कार्य शुरू कर दिया.

70 साल बाद भी नहीं बना पुल! बूसी गांव में कई परिवार हर मानसून में होते हैं कैदZoom

Pali Boosi Village News

पाली. आजादी के सात दशक बाद भी पाली जिले का एक ऐसा गांव जो आज भी नदी पर रपट मार्ग से वंचित है. सरकारों से विनती कर ली सरकारी दफ्तरो के चक्कर भी लगा लिए मगर जब कहीं पर भी सुनवाई नही हुई तो आखिरकार ग्रामीणों ने अपनी परेशानी को दूर करने का जिम्मा खुद ही उठा लिया. इसा बार फिर मानसून में 200 परिवारों के बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल नही जाना पडे इसके लिए ग्रामीणों ने ही जनसहयोग से नदी पर पुलिया निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है. यहं गांव हे पाली जिले में आने वाले सोमेसर कस्बे का बूसी गांव जहां पर सुमेर नदी के पार रहने वाले करीब 200 परिवार इस परेशान का दंश आज भी झेलते आ रहे है.

बारिश के समय हालात यह होते है कि 3 से 4 महीने 200 परिवारों को घरो में कैद रहना पडता है क्योकि रास्ता बंद होने से वह कही जा नही पाते और जाना हो तो जीवन को दाव पर लगाना पडता है.

तीन से चार महीने बारिश में बंद रहता है रास्ता 
सोमेसर कस्बे के बूसी गांव में सुमेर नदी के पार रहने वाले करीब 200 परिवार आजादी के सात दशक बाद भी नदी पर रपट मार्ग से वंचित हैं. सरकारी सहायता न मिलने पर इन ग्रामीणों ने अब जनसहयोग से नदी पर पुलिया निर्माण कार्य शुरू कर दिया है.बारिश के मौसम में नदी में पानी आने पर यह मार्ग तीन-चार महीने तक बाधित रहता है. इस दौरान ग्रामीणों को मवेशियों का दूध पहुंचाने, खाद्य सामग्री लाने, बच्चों को स्कूल भेजने और अस्पताल जाने के लिए जान जोखिम में डालकर बहते पानी को पार करना पड़ता है.

सांसद ने गोद लिया फिर भी मार्ग को तरस गए ग्रामीण 
ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर ग्राम पंचायत की अगुवाई में जिला कलेक्टर, उच्च अधिकारियों, क्षेत्रीय विधायक, सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित में अवगत कराया है. विडंबना यह है कि जिस गांव को सांसद ने गोद लिया था, वहां के निवासी आज भी एक स्थायी मार्ग के लिए तरस रहे हैं.

बजट की आस में खाली रह गए हाथ 
राज्य सरकार के बजट से भी ग्रामीणों को मार्ग निर्माण की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी. इसके बाद ग्रामीणों ने एक समिति बनाकर जनसहयोग से रपट का निर्माण कार्य शुरू करने का निर्णय लिया. समिति के मोहनलाल सीरवी ने बताया कि निर्माण कार्य उनकी अगुवाई में चल रहा है.

इन्होने संभाला जिम्मा 
पानी की व्यवस्था का जिम्मा हनुमानराम चौधरी ने संभाला है. महेंद्रसिंह, राजाराम, भीमराम, सुरेश माली और क्षेत्र के अन्य भामाशाह भी इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं. मोहनलाल सीरवी ने कहा कि यह रपट सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य और मरीजों के लिए जीवनदान है.

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Jagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें

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