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जो स्टूडेंट्स बैंक की जॉब तलाश रहे है. उनका सपना है कि वह बैंक में नौकरी करे तो उन्हें अपना एक लक्ष्य निर्धारित करना होगा. प्रोफेसर ने बताया कि ऐसे स्टूडेंट्स को शुरुआत में ही किसी भी कोचिंग इंस्टिट्यूट में फाउंडेशन कोर्स से शुरुआत करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि फाउंडेशन कोर्स करीब 6 से 8 महीने का होता है, इस दौरान स्टूडेंट्स का बेस जैसे, करंट अफेयर, जनरल नॉलेज, मेथ, इंग्लिश और रीजनिंग को मजबूत किया जाता है.

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आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा निवासी वरिष्ठ प्रोफेसर राजपाल सिंह ने बैंक जॉब को लेकर खास टिप्स दिए है. उन्होंने ऐसे बच्चों को गाइड किया है जो स्पेशल बैंक की तैयारी कर रहे है. लोकल 18 से कहा कि बैंक कि जॉब की तैयारी कर रहे बच्चे अपना सेलेब्स के हिसाब से ही प्रैक्टिस करें. शुरुआत में ऐसे बच्चों को फाउंडेशन बैच शुरू करना चाहिए. इसमें स्टूडेंट्स का बेस मजबूत होता है और अगर नींव मजबूत होगी तो मकान भी मजबूत बनता है. प्रोफेसर ने बताया कि बच्चों को अपनी मैथ पर विशेष फोकस करके रखना है. अधिकतर न्यूमेरिकल ही बच्चों को परेशान करते है, यदि शुरुआत से ही इसकी अच्छी प्रैक्टिस की जाये तो बच्चों को पहली बार में ही सफलता मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि अब इंटरनेट का जमाना है बच्चे नेट के माध्यम से कई सवालों को हल कर सकते हैं.

इस रणनीति से मिलेगी सफलता

आगरा के वरिष्ठ प्रोफेसर और बैंक कोचिंग इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर राजपाल सिंह ने कहा कि जो स्टूडेंट्स बैंक की जॉब तलाश रहे है. उनका सपना है कि वह बैंक में नौकरी करे तो उन्हें अपना एक लक्ष्य निर्धारित करना होगा. प्रोफेसर ने बताया कि ऐसे स्टूडेंट्स को शुरुआत में ही किसी भी कोचिंग इंस्टिट्यूट में फाउंडेशन कोर्स से शुरुआत करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि फाउंडेशन कोर्स करीब 6 से 8 महीने का होता है, इस दौरान स्टूडेंट्स का बेस जैसे, करंट अफेयर, जनरल नॉलेज, मेथ, इंग्लिश और रीजनिंग को मजबूत किया जाता है. उन्होंने कहा कि यह फाउंडेशन कोर्स के बाद बच्चों को अधिक से अधिक मॉक टेस्ट देने चाहिए. यदि बच्चा थोड़ी मेहनत कर इसे पूरा करता है तो दावा है कि वह पहली बार में ही सफलता प्राप्त कर सकता है.

बार बार अभ्यास करने से होगा आसान

आगरा के वरिष्ठ प्रोफेसर और बैंक कोचिंग इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर राजपाल सिंह ने कहा कि बैंक कि जॉब के लिए स्टूडेंट्स को अपनी मेथ मजबूत करनी होगी. अकॉउंट से जुड़े कई अहम सवाल इसमें आते है. उन्होंने कहा कि मेथ के फार्मूले बच्चों को ज्ञात होने चाहिए, यदि उन्हें फॉर्मूले पता होंगे तो आसानी से वह अपना सवाल क्लियर कर सकेंगे. प्रोफेसर ने कहा कि इसके लिए स्टूडेंट्स को मेहनत करनी होगी. प्रोफेसर सिंह ने बताया कि मेथ को मजबूत करने के लिए वह किसी भी कोचिंग सेंटर या ऑनलाइन क्लास भी ले सकते है.

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