-चतुर्दशी और अमावस्या तिथि के संयोग से बना विशेष योग, शाम 5:31 से 7:29 बजे तक रहेगा लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
-प्रदोष काल और वृषभ काल में पूजा करना रहेगा विशेष फलदायी, नरकासुर वध से जुड़ी है छोटी दिवाली की पौराणिक मान्यता
-पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री ने बताया तिथियों का महत्व, गोवर्धन पूजा 10 और भाई दूज 11 नवंबर को मनाई जाएगी
उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। दीपावली के महापर्व को लेकर इस वर्ष तिथियों का विशेष संयोग बन रहा है। चतुर्दशी और अमावस्या तिथि के मेल के कारण छोटी और बड़ी दिवाली की तारीखों को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी और मुख्य दीपावली के पर्व को लेकर तिथियों का विशेष विचार किया जा रहा है। श्री शिव हनुमत धाम कष्ट निवारण धाम एवं श्री पार्थ कृष्णम ज्योतिष, वास्तु एवं कर्मकांड केंद्र, ग्रीन सिटी बी-2, छपरौला के अध्यक्ष पंडित श्री मनोज कृष्ण शास्त्री के अनुसार, दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए प्रदोष काल और वृषभ काल का विशेष महत्व है। इस वर्ष 8 नवंबर, रविवार को दीपावली मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा। इसी दिन छोटी दिवाली का पर्व भी मनाया जाएगा।
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री ने बताया कि कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर दीपावली मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह करीब 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर करीब 12:31 बजे तक रहेगी। दीपावली पूजन का मुख्य आधार प्रदोष काल में अमावस्या तिथि का होना है। इस कारण 8 नवंबर को ही दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन शाम को घरों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी।
उन्होंने बताया कि दीपावली पर प्रदोष काल शाम 5:07 बजे से 7:41 बजे तक रहेगा। वहीं, वृषभ काल यानी स्थिर लग्न शाम 5:31 बजे से 7:29 बजे तक रहेगा। मां लक्ष्मी की पूजा के लिए यही सबसे शुभ समय माना गया है। इस अवधि में पूजा करने के लिए कुल एक घंटा 58 मिनट का समय मिलेगा। इसके अलावा निशिता काल में रात 11:07 बजे से 11:58 बजे तक भी पूजा-अर्चना की जा सकती है।
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री के मुताबिक, दीपावली पर प्रदोष काल का विशेष धार्मिक महत्व है। यह सूर्यास्त के बाद का समय होता है। वहीं, वृषभ काल स्थिर लग्न होने के कारण लक्ष्मी पूजन के लिए उत्तम माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और स्थिरता बनी रहती है। दीपावली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर शक्ति स्वरूपा मां काली की आराधना का भी विशेष विधान है।
नरकासुर के वध की खुशी में मनाई जाती है छोटी दिवाली
छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था। नरकासुर ने अपनी शक्ति के बल पर 16 हजार स्त्रियों को बंदी बना रखा था। उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं और ऋषियों ने भगवान श्रीकृष्ण से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की थी। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का अंत कर बंदी स्त्रियों को मुक्त कराया। मान्यता है कि नरकासुर का वध चतुर्दशी तिथि को हुआ था। इसी विजय की खुशी में दीप जलाकर उत्सव मनाया गया, जो आगे चलकर नरक चतुर्दशी के रूप में प्रसिद्ध हुआ। इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान और दीपदान का भी विशेष महत्व माना जाता है।
पंडित आचार्य श्री मनोज कृष्ण शास्त्री जी महाराज जी ने बताया कि दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक है। इस दिन श्रद्धालु अपने घरों की साफ-सफाई कर दीपों से सजावट करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मां लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं।
आगे के प्रमुख पर्वों की तिथियां
इस वर्ष दीपावली के आसपास पर्वों का क्रम इस प्रकार रहेगा। छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी 7 नवंबर 2026, शनिवार को बताई गई है, जबकि मुख्य दीपावली और लक्ष्मी पूजन 8 नवंबर, रविवार को होगा। गोवर्धन पूजा 10 नवंबर, मंगलवार और भाई दूज 11 नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं से पंचांग के अनुसार शुभ समय में पूजा-अर्चना करने और पर्व को श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाने की अपील की।
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



