जानलेवा बन रहा 4 किलोमीटर लंबा स्कूल जाने वाला सफर
एक तरफ उफनती नहर, दूसरी तरफ हिंसक वन्यजीव गांव की स्थिति इतनी विकट है कि नजदीकी स्कूल 3 से 4 किलोमीटर दूर स्थित है. स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों के सामने दो तरफ मौत का साया मंडराता रहता है. रास्ते में पड़ने वाली नहर पार करते समय कई बच्चे हादसों का शिकार हो चुके हैं. गांव का दूसरा किनारा घने जंगल से सटा हुआ है, जहां अक्सर तेंदुए जैसे हिंसक वन्यजीवों के हमले का खतरा बना रहता है. गांव की महिला शांति देवी और कमली देवी का कहना है कि मजदूरी करने वाले अभिभावक जब तक बच्चे लौटकर घर नहीं आ जाते, तब तक खौफ के साये में रहते हैं. अगर किसी दिन बच्चे को छोड़ने कोई न जा पाए, तो डर के मारे बच्चे घर पर ही रहने को मजबूर होते हैं.
शिक्षा नहीं तो भविष्य अंधकारमय
गांव की समझदार और पढ़ी लिखी मंजू देवी बताती हैं कि 12 साल पहले जब वह शादी करके इस गांव में आई, तो उन्होंने देखा कि 0 से 5 साल तक के छोटे बच्चों के लिए न तो कोई आंगनवाड़ी है और ना ही प्राथमिक विद्यालय,गांव के लगभग 200 से 250 बच्चे दिनभर खेत-खलिहानों में कंचा और गोली-डंडा खेलते रहते हैं. अगर आज इन्हें शिक्षा नहीं मिली, तो आने वाले समय में इनका भविष्य पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा. हम कम पढ़े-लिखे हो सकते हैं, पर शिक्षा का महत्व अच्छे से समझते हैं.
जमीनी विवाद और प्रशासनिक बहानेबाजी
मंजू देवी ने बताया कि वे बेसिक शिक्षा अधिकारी BSA और जिलाधिकारी के चक्कर काटते-काटते थक चुकी हैं. अधिकारियों द्वारा यह तर्क दिया गया था कि गांव में स्कूल के लिए जमीन नहीं है. जब महिलाओं ने 5 बीघा 11 बिस्वा ग्राम समाज की जमीन की बात उठाई, तो प्रशासन ने उसे खलिहान की जमीन बताकर खारिज कर दिया. हालांकि, पहले भी उन्हें यह आश्वासन दिया गया था कि बजट रिलीज हो गया है और काम जल्द शुरू होगा, लेकिन साल बीत जाने के बाद भी धरातल पर कुछ नहीं बदला.
अब उम्मीद की नई किरण
हाल ही में जब गांव की महिलाओं का प्रतिनिधिमंडल एक बार फिर जिलाधिकारी से मिला, तो उन्हें एक नई उम्मीद मिली है. डीएम साहब ने आश्वासन दिया है कि दीपावली से पहले अधिकारियों की टीम गांव पहुंचकर एक विशेष शिविर लगाएगी, जमीन का भौतिक निरीक्षण करेगी और जल्द से जल्द स्कूल निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. अब देखना यह होगा कि 12 सालों का यह लंबा संघर्ष और प्रशासनिक आश्वासन इस बार धरातल पर उतरता है या मासूम बच्चों को फिर से अपनी जान जोखिम में डालकर शिक्षा हासिल करनी पड़ेगी,पूरा मामला बहराइच जिले के कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी में मिहींपुरवा तहसील के गांव भट्ठा और बरगदाह का है.
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