इस बातचीत में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के साथ बैठक में पाकिस्तान को F-16 लड़ाकू विमानों के अपग्रेड और मेंटेनेंस के लिए अमेरिकी मदद पर चिंता जताई. भारत की चिंता यह है कि पाकिस्तान को मिलने वाली उन्नत सैन्य तकनीक का इस्तेमाल क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित करने के लिए हो सकता है.
पाकिस्तान के F-16 अपग्रेड पर क्यों है भारत की नजर?
दरअसल अमेरिका ने दिसंबर 2025 में पाकिस्तान के F-16 विमानों के अपग्रेड और उनकी ऑपरेशनल क्षमता बनाए रखने के लिए 68.6 करोड़ डॉलर के पैकेज को मंजूरी दी थी. इसमें Link-16 सामरिक डेटा-लिंक प्रणाली, एवियोनिक्स से जुड़े अपडेट, तकनीकी उपकरण, प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सहायता शामिल हैं. अमेरिकी दस्तावेज के मुताबिक, इस पैकेज का उद्देश्य पाकिस्तान के F-16 विमानों की क्षमता बनाए रखना और उनके अमेरिकी तथा सहयोगी सेनाओं के साथ तालमेल को बेहतर करना है. विमान बेड़े की सेवा अवधि को 2040 तक बढ़ाने की भी बात कही गई थी.
भारत के लिए यह मामला इसलिए संवेदनशील है, क्योंकि पाकिस्तान उसका पड़ोसी होने के साथ सैन्य प्रतिद्वंद्वी भी है. ऐसे में पाकिस्तान की वायुसेना को मिलने वाली तकनीकी सहायता का असर दक्षिण एशिया के सुरक्षा समीकरणों पर पड़ सकता है. भारत की चिंता का एक पहलू यह भी है कि पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा सहयोग लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है, जिसे देखते हुए भारत ने संवेदनशील तकनीक के तीसरे पक्ष के हाथों में पहुंचने का मुद्दा उठाया.
भारत-अमेरिका के 10 साल के रक्षा ढांचे की समीक्षा
इस बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने बातचीत को ‘उत्कृष्ट’ बताया. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने 10 साल के रक्षा ढांचे की प्रगति की समीक्षा की और सैन्य तकनीक, सूचना साझा करने तथा संयुक्त उत्पादन के क्षेत्रों में रणनीतिक तालमेल को आगे बढ़ाने पर चर्चा की. सिंह के मुताबिक, मजबूत भारत-अमेरिका साझेदारी स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है.
अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ ने भी बैठक को सकारात्मक बताया. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने प्रमुख रक्षा साझेदारी के ढांचे की पहली वर्षगांठ का जिक्र किया और सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की.
हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर भी चर्चा
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग ऐसे समय में आगे बढ़ रहा है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चुनौतियां दोनों देशों के लिए अहम बनी हुई हैं. सेबू में हुई बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा की बदलती परिस्थितियों और रणनीतिक चुनौतियों की भी समीक्षा की गई.
भारत और अमेरिका पिछले कई वर्षों में रक्षा सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौते कर चुके हैं. इनमें 2016 का लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA), 2018 का कम्युनिकेशंस कम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (COMCASA) और 2020 का बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA) शामिल हैं. इन समझौतों ने दोनों सेनाओं के बीच लॉजिस्टिक सहयोग, सुरक्षित संचार और भू-स्थानिक सूचनाओं के आदान-प्रदान को बढ़ाने का आधार तैयार किया है. (एजेंसी इनपुट के साथ)
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