इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स आवासीय सोसाइटी में अवैध निर्माण के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने बिल्डर को राहत देने वाले तीसरे शमन आदेश को निरस्त करते हुए टावर संख्या 27 और 28 को पूरी तरह ध्वस्त करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही टावर संख्या 16, 17, 18 और 19 की नौवीं व दसवीं मंजिल भी दो महीने के भीतर गिराने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने बिल्डर पर 25 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया है।यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने 27 अक्तूबर को सुरेश चंदर व 10 अन्य तथा गुलमोहर ग्रीन्स रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया।
पूर्णता प्रमाणपत्र के बिना दिया फ्लैटों पर कब्जा
अदालत ने कहा कि बिल्डर ने अनिवार्य पूर्णता प्रमाणपत्र प्राप्त किए बिना ही फ्लैटों का कब्जा दे दिया। इससे सोसाइटी में रहने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ी। कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि बिल्डर की अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।