ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि लोकतंत्र में शासन परिवर्तन (रिजीम चेंज) की मांग करने में कोई गलत बात नहीं है।सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने बोरा की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में शासन परिवर्तन (रिजीम चेंज) संबंधी बयान का जिक्र किया। बोरा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा, लोकतंत्र में शासन परिवर्तन में कोई गलत बात नहीं है। इस पर एएसजी ने कहा शासन परिवर्तन वोट से होता है, न कि नई दिल्ली के तंत्र में घुसे लंपट तत्वों से।
न्यायमूर्ति प्रसाद ने पूछा कि क्या उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत वही काम कर रहा है जो मजिस्ट्रेट को धारा 135(3) के तहत करना चाहिए। अदालत ने कहा कि नोटिस के अंतिम तीन शब्दों के कारण उसका उद्देश्य यह प्रतीत होता है कि जांच के दौरान मुचलका न दिया जाए। अदालत ने सुझाव दिया कि क्या बेहतर नहीं होगा कि धारा 135 की जांच पूरी होने का इंतजार किया जाए और फिर अदालत का रुख किया जाए। यह कलंक अनुच्छेद 21 से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि मामले में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है और याचिकाकर्ता को जांच पूरी होने तक इंतजार करना चाहिए।
ऐसे बढ़ी सुनवाई
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि मामला बहुत संकीर्ण है और बीएनएसएस की धारा 126 तथा 130 के तहत जारी नोटिस से संबंधित है। उन्होंने बताया कि नेहा बोरा एआईएसए की नेता हैं और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। देश में समय-समय पर सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं, लेकिन उनकी मुवक्किल की ओर से कभी हिंसा के लिए उकसाया नहीं गया। सभी प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे। उन्होंने सुधारों की मांग की है और समय-समय पर ट्वीट करके लोगों से जुड़ने की अपील की है। 15 अक्टूबर को प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी। 16 अक्टूबर को दोपहर 4 बजे एक पोस्ट डाली गई, जो जंतर मंतर के अचानक डिनोटिफाई किए जाने के विरोध में थी।
एएसजी ने रखा पुलिस का पक्ष
एएसजी चेतन शर्मा ने बीएनएसएस प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 126 और 130 एक साथ चलती हैं। इन्हें अलग नहीं किया जा सकता। शांति भंग की संभावना होने पर ये धाराएं लागू होती हैं। तकनीकी विभाजन सार्वजनिक शांति के सार को छीन लेगा। मजिस्ट्रेट ने कलंदरा का निरीक्षण किया और उसके बाद नोटिस जारी किया। एएसजी ने दावा किया कि मंडी हाउस का आह्वान केवल था और सीपी नहीं तथा धारा 163 लागू नहीं थी, यह गलत है। धारा 163 लागू थी। पुलिस संख्या में कम थी।
नेहा बोरा का कोर्ट में दावा : सीजेपी के प्रदर्शन से नहीं था कोई संबंध
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को स्पष्ट रूप से कहा कि वह सीजेपी की ओर से कनॉट प्लेस में राष्ट्रीय झंडा फहराने वाले प्रदर्शन से जुड़ी नहीं थीं। उनकी ओर से यह दावा किया गया कि 16 अक्टूबर को उन्होंने खुद ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया था और सीजेपी के आह्वान में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। साथ ही उन्होंने जोड़ा कि देश में तिरंगा फहराने के लिए उन्हें किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।
यह बयान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की अदालत में उस याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें बोरा ने शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का व्यक्तिगत बांड भरने संबंधी नोटिस को चुनौती दी है। अदालत ने पक्षों की 2.5 घंटे से अधिक सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया और कहा कि आदेश शुक्रवार शाम 6 बजे सुनाया जाएगा। बोरा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने तर्क दिया कि 16 अक्टूबर की शाम मंडी हाउस पहुंचने के महज 10-15 मिनट बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। उस दिन वे किसी भी अपराध की दोषी नहीं थीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और वे सीजेपी के अलग प्रदर्शन आह्वान से पूरी तरह अलग थीं।
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