नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में अमित शाह की रणनीति क्या रही?
नक्सलवाद लंबे समय तक देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने गंभीर चुनौती रहा. छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा समेत कई राज्यों के प्रभावित इलाकों में हिंसा के कारण विकास कार्यों और आम लोगों की जिंदगी पर असर पड़ा. केंद्र सरकार ने सुरक्षा अभियानों के साथ सड़क, मोबाइल नेटवर्क, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की रणनीति अपनाई.
गृह मंत्री अमित शाह ने 24 अगस्त 2024 को 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य घोषित किया था. इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय के साथ अभियान चलाया गया. सुरक्षा बलों की कार्रवाई के अलावा आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और प्रभावित क्षेत्रों में विकास पर भी जोर दिया गया.
30 मार्च 2026 को लोकसभा में शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान पर सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित इलाकों में 17,589 किलोमीटर सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी गई थी. इनमें से लगभग 12,000 किलोमीटर सड़कें बन चुकी थीं. उन्होंने मोबाइल नेटवर्क, बैंक शाखाओं और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का भी उल्लेख किया.
31 मार्च 2026 को नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में निर्णायक पड़ाव आया
केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 को भारत को नक्सलवाद से मुक्त बनाने के लक्ष्य की पूर्ति की घोषणा की. यह घोषणा अमित शाह के कार्यकाल की प्रमुख आंतरिक सुरक्षा उपलब्धियों में गिनी जा रही है. हालांकि, इसे सरकारी अभियान के घोषित लक्ष्य और उसके आकलन के संदर्भ में समझना जरूरी है.
इस अभियान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, राज्य पुलिस और स्थानीय सुरक्षा इकाइयों की भूमिका रही. प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा शिविरों की स्थापना और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई. इसके साथ ही आत्मसमर्पण करने वालों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर देने की नीति भी अपनाई गई.
इस रणनीति का दूसरा पहलू विकास था. सड़कों और संचार सुविधाओं के विस्तार से दूरदराज के इलाकों तक प्रशासन की पहुंच बढ़ाने की कोशिश हुई. इससे स्थानीय लोगों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने का रास्ता खुला.
ड्रग्स के खिलाफ अमित शाह की सरकार ने कौन से कदम उठाए?
नशे की तस्करी केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है. इसका असर युवाओं, परिवारों और समाज की सुरक्षा पर भी पड़ता है. केंद्र सरकार ने ड्रग्स के कारोबार पर कार्रवाई के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और राज्य पुलिस सहित कई एजेंसियों के बीच समन्वय पर जोर दिया.
31 मार्च 2025 को दिल्ली-एनसीआर में एक कार्रवाई के दौरान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और दिल्ली पुलिस ने मेथामफेटामाइन, एमडीएमए और कोकीन जब्त की. इनकी कीमत करीब 27.4 करोड़ रुपये बताई गई और पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया. अप्रैल 2025 में गुजरात एटीएस और भारतीय तटरक्षक बल की कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के पास 300 किलोग्राम मादक पदार्थ भी जब्त किए गए. इन मामलों से पता चलता है कि कार्रवाई केवल सड़क स्तर की तस्करी तक सीमित नहीं रही.
क्या ड्रग्स की समस्या पूरी तरह खत्म हो गई है?
ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई में जब्ती और गिरफ्तारियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनसे समस्या के पूरी तरह खत्म होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. तस्करी के नेटवर्क को कमजोर करने के साथ नशे की मांग कम करना और नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार उपलब्ध कराना भी जरूरी है.
फरवरी 2026 में केंद्र सरकार ने 2026 से 2029 तक भारत को ड्रग्स मुक्त बनाने के लिए तीन वर्षीय रोडमैप की जानकारी दी. इसमें नशे के नेटवर्क को स्रोत से वितरण तक तोड़ने और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया.
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