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वुम्मिदी एथिराज तमिलनाडु के एक प्रतिष्ठित शिल्पकार परिवार से ताल्लुक रखते थे. वह चेन्नई के वुम्मिदी बंगारू चेट्टी परिवार से जुड़े थे, जिसने ऐतिहासिक सेंगोल को तैयार किया था. सेंगोल चांदी से बनाया गया था और उस पर सोने की परत चढ़ाई गई थी. उनका जन्म 25 नवंबर 1926 को हुआ था, इस लिहाज से अगले महीने ही वह उम्र के 100 साल पूरे करने वाले थे.
पीएम नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक राजदंड ‘सेंगोल’ को तैयार करने वाले वुम्मिदी एथिराज के निधन पर शोक जताया है.
भारत की आजादी और संसदीय इतिहास से जुड़े ऐतिहासिक राजदंड ‘सेंगोल’ को तैयार करने वाले वुम्मिदी एथिराज का बुधवार को निधन हो गया. उनका जन्म 25 नवंबर 1926 को हुआ था, इस लिहाज से अगले महीने ही वह उम्र के 100 साल पूरे करने वाले थे. उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताते हुए उन्हें भारतीय संस्कृति और विरासत में अहम योगदान देने वाला शिल्पकार बताया. एथिराज का नाम उस सेंगोल से जुड़ा था, जिसे 1947 में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किया गया था. साल 2023 में नए संसद भवन में स्थापित किए जाने के बाद सेंगोल एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया था.
कौन थे वुम्मिदी एथिराज?
वुम्मिदी एथिराज तमिलनाडु के एक प्रतिष्ठित शिल्पकार परिवार से ताल्लुक रखते थे. वह चेन्नई के वुम्मिदी बंगारू चेट्टी परिवार से जुड़े थे, जिसने ऐतिहासिक सेंगोल को तैयार किया था. सेंगोल चांदी से बनाया गया था और उस पर सोने की परत चढ़ाई गई थी. इसके शीर्ष पर नंदी की आकृति है. सेंगोल को राजसत्ता, न्याय और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है.
वर्ष 1947 में भारत की आजादी के समय तैयार किया गया यह राजदंड तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था. दशकों बाद, 28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर इसे लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी के पास स्थापित किया गया. इसके बाद सेंगोल और इसे बनाने वाले कारीगर परिवार के योगदान को देशभर में नई पहचान मिली.
एथिराज के निधन पर पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंग्रेजी और तमिल में शोक संदेश जारी कर एथिराज के निधन पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि एथिराज का योगदान देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा रहेगा. प्रधानमंत्री ने उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की.
पीएम मोदी ने सेंगोल को लेकर एथिराज से हुई अपनी मुलाकात को भी याद किया. उन्होंने बताया कि नए संसद भवन के उद्घाटन की तैयारियों के दौरान सेंगोल को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने के बीच उन्हें अनुभवी शिल्पकार से मिलने और देश की संस्कृति के लिए उनके योगदान के प्रति आभार जताने का अवसर मिला था.
प्रधानमंत्री ने सेंगोल को नए संसद भवन में प्रमुख स्थान दिए जाने को अपनी सरकार के लिए सम्मान की बात बताया. उनके मुताबिक, इस कदम से देश की नई पीढ़ी को इस ऐतिहासिक वस्तु और उसके पीछे की शिल्पकला को समझने का अवसर मिला.
आजादी के इतिहास से संसद तक पहुंचा सेंगोल
सेंगोल का इतिहास भारत की आजादी के दौर से जुड़ा है. इसे 1947 में नेहरू को भेंट किया गया था. तमिल परंपरा में सेंगोल को न्यायपूर्ण शासन और सत्ता के दायित्व का प्रतीक माना जाता है. वर्ष 2023 में नए संसद भवन में इसकी स्थापना के बाद यह देश की संसदीय विरासत का भी एक प्रमुख प्रतीक बन गया.
वुम्मिदी एथिराज के निधन के साथ उस शिल्पकार पीढ़ी से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कड़ी का अंत हो गया, जिसका काम आजादी के समय की ऐतिहासिक घटना से लेकर आधुनिक भारत की संसद तक पहुंचा. प्रधानमंत्री मोदी के संदेश ने एक बार फिर इस बात को रेखांकित किया कि ऐतिहासिक धरोहरों के पीछे उन कारीगरों की मेहनत और हुनर भी होता है, जिनके योगदान को अक्सर समय के साथ भुला दिया जाता है. (IANS इनपुट के साथ)
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साद बिन उमर मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं, जहां वे होम पेज डेस्क पर काम करते हैं.
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