राजनाथ सिंह ने साफ किया कि अगर वक्त रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जरूरी सामान की किल्लत और आर्थिक असमानता का संकट विकराल रूप ले लेगा. इस दौरान उन्होंने एनर्जी, फूड सिक्योरिटी और तेजी से बदलती नई टेक्नोलॉजी के खतरों पर दुनिया के नेताओं का ध्यान खींचा.
राजनाथ सिंह ने मंच से कहा, ‘आज पूरी दुनिया अनिश्चितता के खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुकी है.’ देशों के आपसी टकराव और जंग जैसे माहौल ने ग्लोबल सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है. एक देश से दूसरे देश तक जरूरी सामान पहुंचाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है. सीमाओं पर जारी तनातनी का सीधा असर अब आम आदमी की जेब और वैश्विक व्यापार पर दिखने लगा है.
एनर्जी और फूड सिक्योरिटी पर गहराया खतरा
दुनियाभर में ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा का मुद्दा अब सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है. रक्षा मंत्री ने इन चिंताओं को उठाते हुए आगाह किया…
* कच्चे तेल और गैस समेत ऊर्जा संकट आने वाले दिनों में कई देशों की रफ्तार रोक सकता है.
* अनाजों और जरूरी खाद्य पदार्थों की कमी से भुखमरी और महंगाई का खतरा बढ़ रहा है.
* बुनियादी जरूरतों को पूरा करना कई मुल्कों के लिए अब अस्तित्व की लड़ाई बन गया है.
नई टेक्नोलॉजी और बढ़ता सामाजिक अंतर
आधुनिक तकनीक दुनिया की अर्थव्यवस्था का चेहरा तेजी से बदल रही है. हालांकि यह बदलाव सबके लिए एक जैसा फायदेमंद साबित नहीं हो रहा है. रक्षा मंत्री के मुताबिक, एडवांस टेक्नोलॉजी की इस अंधी दौड़ ने देशों और समाजों के बीच खाई को और चौड़ा कर दिया है. संपन्न देश जहां तेजी से आगे निकल रहे हैं, वहीं कमजोर देश इस होड़ में पिछड़ते जा रहे हैं.
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऐसे समय में SCO की असली सफलता इस बात से तय होगी कि सदस्य देश साझा मुद्दों पर कितनी सहमति बना पाते हैं और मिलकर उन पर कितना काम करते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते वैश्विक हालात में केवल बैठकें करना काफी नहीं है. जरूरी है कि SCO देश आपसी सहमति के आधार पर साझा चुनौतियों का समाधान निकालें और सहयोग को आगे बढ़ाएं.
रक्षा मंत्री ने आर्थिक सहयोग को लेकर भारत का दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि सदस्य देशों के बीच आर्थिक भागीदारी समावेशी होनी चाहिए और इससे प्रत्येक देश को लाभ मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि सभी देशों को अधिक मजबूत और संकटों का सामना करने में सक्षम आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाने, व्यापार और निवेश को आसान बनाने तथा विकास के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की दिशा में काम करना चाहिए.
राजनाथ सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि आर्थिक सहयोग का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए. भारत वर्ष 2026 से 2030 की अवधि के लिए बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्ययोजना को अपनाने का समर्थन करता है. उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि उसके लाभ को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाना भी होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि साझा समृद्धि के लिए संपर्क व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. भारत ऐसी संपर्क परियोजनाओं का समर्थन करता है, जो बाजारों को जोड़ें, व्यापार को आसान बनाएं और विकास के नए अवसर पैदा करें. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहल मध्य एशिया को व्यापक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं.
हालांकि, रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि संपर्क परियोजनाएं परामर्श और उनमें शामिल प्रत्येक देश की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जो परियोजनाएं इन सिद्धांतों का सम्मान नहीं करतीं, वे टिकाऊ नहीं हो सकतीं. रक्षा मंत्री ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में मुंबई में मध्य एशिया की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई थी. उन्होंने इसमें मध्य एशिया के देशों और शंघाई सहयोग संगठन के साझेदार देशों की सक्रिय भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने यह भी बताया कि इस संगोष्ठी के साथ पहली बार शंघाई सहयोग संगठन एशियाई आर्थिक संवाद का आयोजन किया गया. इन प्रयासों का उद्देश्य क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना था.
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