मुलाकात से इनकार, लेकिन न्यायिक रास्ता खुला
दरअसल सीजेआई सूर्यकांत ने इन विपक्षी नेताओं को मुलाकात का समय देने से इनकार करते हुए कहा कि जिन मुद्दों पर वे ज्ञापन सौंपना चाहते हैं, वे पहले से ही अदालत में विचाराधीन हैं. ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर बैठक करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के जरिए अदालत का दरवाजा खटखटाना उचित होगा. सीजेाई सूर्यकांत ने 11 अक्टूबर को लिखे पत्र में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के उस अनुरोध का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने 12 अक्टूबर को शाम 4 से 5 बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था. इन विपक्षी नेताओं का मकसद मुख्य चुनाव आयुक्त और भारतीय निर्वाचन आयोग, कई छात्रों की कथित मनमानी गिरफ्तारी, मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने और ट्रेनों को रद्द करने जैसे मुद्दों पर ज्ञापन सौंपना था.
सीजेआई ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि इन मुद्दों से संबंधित मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं. ऐसे मामलों पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाना संविधान में निहित शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) के सिद्धांत के विपरीत होगा. उन्होंने इसे न्यायिक मर्यादा और स्थापित परंपराओं के अनुरूप भी नहीं माना.
हालांकि, सीजेआई ने विपक्षी नेताओं को बताया कि अगर इन मुद्दों पर अदालत का हस्तक्षेप चाहिए, तो इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन देने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जा सकती है.
अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल करने का सुझाव
सीजेआई सूर्यकांत ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 32 का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को प्रशासनिक स्तर पर विपक्षी नेताओं की तरफ से उठाए गए मुद्दों से निपटने की शक्तियां नहीं दी गई हैं. लेकिन नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर अदालत को न्यायिक पक्ष में विचार करना उसका संवैधानिक दायित्व है.
अनुच्छेद 32 नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है. सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और नागरिक कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत किसी भी समय उनके संरक्षण के लिए अदालत का रुख कर सकते हैं.
पत्र में उन्होंने लिखा कि विपक्षी नेताओं के लिए प्रशासनिक पक्ष में ज्ञापन सौंपने के बजाय सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक शक्तियों का इस्तेमाल करना अधिक उचित होगा. इस तरह सीजेआई ने यह स्पष्ट किया कि मुलाकात नहीं होने का अर्थ अदालत के न्यायिक दरवाजे बंद होना नहीं है. यदि विपक्षी नेता कानून के मुताबिक याचिका दाखिल करते हैं, तो उस पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत विचार किया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का भी किया जिक्र
सीजेआई ने अपने पत्र में यह भी बताया कि इसी तरह के मुद्दों से संबंधित कुछ मामले मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं. उन्होंने विपक्षी नेताओं को सलाह दी कि यदि वे उचित समझें, तो सोमवार को ही याचिका दाखिल कर सकते हैं. इसके लिए उन्होंने दो विकल्प बताए. पहला, सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच खुल याचिका दाखिल करें या फिर ई-फाइलिंग के जरिये याचिका दायर करें. सीजेआई ने यह आश्वासन भी दिया कि ऐसी याचिका पर कानून के अनुसार जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी.
INDIA गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट तक निकाला मार्च
सीजेआई से मुलाकात का समय नहीं मिलने के बावजूद INDIA गठबंधन ने सोमवार को अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा. राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस से सुप्रीम कोर्ट तक ‘चलो दिल्ली’ मार्च का नेतृत्व किया. इस मार्च के जरिए विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर अपनी मांगें सामने रखीं.
राहुल गांधी ने इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा था, ‘लोकतंत्र के लिए मार्च. न्याय के लिए मार्च. चलो दिल्ली.’ विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों और नागरिक अधिकारों के मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए.
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