- डीसीपी बलवंत कुमार चौधरी ने सीनियर सिटीजन हेल्प डेस्क प्रभारियों को दिए सख्त निर्देश
- वरिष्ठ नागरिकों की शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, प्राथमिकता के आधार पर हो कार्रवाई
- परिवार में बच्चों की वजह से परेशानी हो तो पहले समझाएं, जरूरत पडऩे पर अपनाएं कानूनी रास्ता
- बुजुर्गों से सौम्य व्यवहार करें पुलिसकर्मी, उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर पुलिस ने सीनियर सिटीजन हेल्प डेस्क की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने पर जोर दिया है। शनिवार को पुलिस उपायुक्त मुख्यालय बलवंत कुमार चौधरी ने पुलिस लाइन्स स्थित परमजीत हॉल में सभी थानों के सीनियर सिटीजन हेल्प डेस्क प्रभारियों के साथ गोष्ठी कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं को केवल एक शिकायत के रूप में न देखा जाए, बल्कि उनकी परिस्थितियों और भावनाओं को समझते हुए संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाए। गोष्ठी में वरिष्ठ नागरिकों को होने वाली विभिन्न परेशानियों, उनकी सुरक्षा, शिकायतों के त्वरित निस्तारण और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। डीसीपी ने सभी हेल्प डेस्क प्रभारियों को निर्देशित किया कि बुजुर्गों से बातचीत करते समय पुलिसकर्मी अपने व्यवहार में शालीनता, धैर्य और संवेदनशीलता बनाए रखें।
उनकी बात ध्यान से सुनें और उनकी परेशानी को समझकर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएं। डीसीपी बलवंत कुमार चौधरी ने सभी थानों के सीनियर सिटीजन हेल्प डेस्क प्रभारियों को निर्देशित किया कि वे अपने क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के प्रति सजग रहें। शिकायत मिलने पर संबंधित मामले की गंभीरता के अनुसार तत्काल आवश्यक कदम उठाएं तथा निस्तारण की प्रक्रिया पर भी ध्यान दें। वरिष्ठ नागरिकों को यह भरोसा मिलना चाहिए कि उनकी परेशानी सुनने और सहायता करने के लिए पुलिस उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनके सम्मान, सुरक्षा तथा अधिकारों की रक्षा करना पुलिस की जिम्मेदारी है।
पुलिसकर्मी अपने व्यवहार और कार्यशैली से ऐसा विश्वास कायम करें कि कोई भी बुजुर्ग अपनी समस्या लेकर पुलिस के पास आने में हिचकिचाए नहीं। गोष्ठी के माध्यम से डीसीपी मुख्यालय ने स्पष्ट संदेश दिया कि वरिष्ठ नागरिकों की शिकायतों के समाधान में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दोनों आवश्यक हैं। पुलिस का प्रयास होना चाहिए कि बुजुर्गों को समय पर सहायता मिले, उनकी समस्याओं का प्राथमिकता से निस्तारण हो और आवश्यकता पडऩे पर कानून के तहत प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कानूनी कार्रवाई से पहले समझें बुजुर्गों की पीड़ा
डीसीपी बलवंत कुमार चौधरी ने निर्देश दिए कि वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों में केवल औपचारिकता पूरी करना पर्याप्त नहीं होगा। पुलिसकर्मियों को उनकी समस्याओं की गंभीरता समझते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा। कई बार बुजुर्ग अपनी उम्र, पारिवारिक परिस्थितियों और भावनात्मक जुड़ाव के कारण अपनी परेशानी खुलकर नहीं बता पाते।
ऐसे में हेल्प डेस्क प्रभारियों की जिम्मेदारी है कि वे विश्वास का माहौल बनाकर उनकी बात सुनें और उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराएं। उन्होंने जोर दिया कि वरिष्ठ नागरिकों के साथ संवाद करते समय ऐसा व्यवहार किया जाए, जिससे उन्हें पुलिस के सामने अपनी बात रखने में संकोच न हो। उनकी शिकायतों को टालने या अनावश्यक रूप से लंबित रखने के बजाय प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
परिवार के विवादों में पहले समझाइश, जरूरत पर कानूनी कार्रवाई
गोष्ठी में वरिष्ठ नागरिकों के परिवार से जुड़ी समस्याओं पर भी विशेष जोर दिया गया। यदि किसी बुजुर्ग को अपने ही परिवार में बच्चों या अन्य परिजनों के व्यवहार के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो पुलिस पहले मामले की वास्तविक स्थिति समझे और उचित समझाइश के माध्यम से समाधान का प्रयास करे। हालांकि, यदि समझाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होता या वरिष्ठ नागरिक के अधिकारों, सुरक्षा अथवा सम्मान पर आंच आती है, तो नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। डीसीपी ने स्पष्ट किया कि पारिवारिक मामला होने का अर्थ यह नहीं है कि बुजुर्ग की शिकायत को नजरअंदाज कर दिया जाए। पुलिस का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित माहौल देना और उनकी समस्याओं का उचित समाधान सुनिश्चित करना है। जरूरत पडऩे पर उन्हें कानूनी सहायता और संबंधित पुलिस सेवाओं से भी जोड़ा जाए।
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