India 5th Generation Jet: भारत अपने डिफेंस सिस्टम को लगातार मजबूत बनाने में जुटा है. ग्लोबल लेवल पर जिस तरह से हालात बदले हैं, उसके बाद भारत के लिए आर्मी के साथ ही एयरफोर्स और नेवी को अपग्रेड करना जरूरी हो गया है. इस बीच चीन और पाकिस्तान के बीच 5th जेनरेशन फाइटर जेट की संभावित डील ने नई दिल्ली की चिंताओं को बढ़ा दिया है. इस बीच, रूस ने ऐसा ऑफर दिया है, जिससे भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना तक बढ़ सकती है.
रूस ने भारत को पांचवीं पीढ़ी के 140 Su-57E लड़ाकू विमान का ऑफर दिया है. (फाइल फोटो/Reuters)
दरअसल, रूस भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान Su-57E के कम से कम 140 विमानों की खरीद के लिए तैयार करने में जुटा है. इस प्रस्ताव के तहत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के नासिक प्लांट को Su-57E के स्थानीय उत्पादन केंद्र में बदलने की पेशकश की गई है. रूसी पक्ष का मानना है कि इतने बड़े ऑर्डर से उत्पादन लाइन में बदलाव, जरूरी उपकरणों और तकनीक हस्तांतरण पर होने वाले निवेश की लागत की भरपाई संभव हो सकेगी. हालांकि, यह प्रस्ताव अभी बातचीत के स्तर पर है और भारत की ओर से 140 विमानों की खरीद पर अंतिम फैसला होने की पुष्टि नहीं हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, रूस चाहता है कि भारत पहले 40 Su-57E विमानों की खरीद के बाद स्थानीय उत्पादन के लिए अतिरिक्त 100 विमानों का ऑर्डर देने पर प्रतिबद्धता जताए. शुरुआती 40 विमानों की खरीद सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत होने की संभावना बताई गई है. इस शुरुआती प्रस्ताव में केवल एक सीट वाले लड़ाकू विमानों को शामिल करने की बात कही गई है.
भारत ने फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट भी खरीदने की योजना बनाई है. (फाइल फोटो/Reuters)
नासिक प्लांट में करना होगा बदलाव
प्रस्ताव के मुताबिक, एचएएल के नासिक संयंत्र में मौजूदा Su-30MKI उत्पादन लाइन को Su-57E के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, इसके लिए बड़े पैमाने पर बदलाव करने होंगे. रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादन लाइन को नए विमान के अनुकूल बनाने के लिए करीब 50 से 60 प्रतिशत नए टूलिंग उपकरणों की जरूरत पड़ सकती है. Su-30MKI के लिए खरीदे गए 12 अतिरिक्त विमानों की आपूर्ति पूरी होने और मौजूदा उत्पादन लाइन बंद होने के बाद इस प्लांट को नए कार्यक्रम के लिए तैयार करने का विकल्प सामने आया है. रूस स्थानीय उत्पादन के साथ 60 प्रतिशत से अधिक तकनीक हस्तांतरण (टीओटी) की पेशकश भी कर रहा है.
दो सीटों वाले विमान पर भी विचार
सॉफ्टवेयर और रडार पर अधिकार की पेशकश
रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने विमान के मिशन कंप्यूटर और रडार का सोर्स कोड उपलब्ध कराने की पेशकश की है. इससे भारत को अपने हथियार प्रणालियों को विमान में एकीकृत करने में अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है और इसके लिए रूसी कंपनियों पर निर्भरता घट सकती है. हालांकि, Su-57E के 140 विमानों और फ्रांस से 114 राफेल विमानों की संभावित खरीद पर एक साथ विचार करने की स्थिति में वायुसेना के बजट पर बड़ा दबाव पड़ सकता है. ऐसे में प्रस्तावित तकनीक हस्तांतरण, स्वदेशी उत्पादन की लागत और दीर्घकालीन परिचालन जरूरतें भारत के अंतिम फैसले में अहम भूमिका निभाएंगी.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…
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