- जागरूकता ही प्रकृति बचाने की शुरुआत : ईशा तिवारी
- वन्यजीव सप्ताह के समापन पर चित्रकला प्रदर्शनी, सात कला संस्थानों के 12 कलाकारों ने दिखाई प्रतिभा
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। वन्यजीवों और प्रकृति के संरक्षण का संदेश गुरुवार को रंगों और चित्रों के जरिए लोगों तक पहुंचा। वन्यजीव सप्ताह के समापन अवसर पर वन विभाग, गाजियाबाद की ओर से गुरुवार को आर्ट लिपि गैलरी स्टूडियो में चित्रकला प्रदर्शनी आयोजित की गई। प्रदर्शनी में वन्यजीव, प्रकृति, पर्यावरण और जैव विविधता से जुड़े चित्रों के माध्यम से संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और अपनी कलाकृतियों के जरिए प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का परिचय दिया। प्रदर्शनी में शेड्स आर्ट स्टूडियो, आर्ट पैशन स्टूडियो, अब्धेश मधुबनी आर्टिस्ट, अनुभा कर्ण मधुबनी आर्टिस्ट, आर्ट लिपि स्टूडियो, चेतनाज आर्ट्स स्टूडियो तथा इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट एंड डिजाइन समेत सात कला संस्थानों और कलाकार समूहों के 12 कलाकारों ने प्रतिभाग किया। कलाकारों ने वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर तैयार चित्र प्रदर्शित किए।
ग्रीन फील्ड स्कूल, रामकृष्ण इंस्टीट्यूट, इनग्राहम इंग्लिश मीडियम स्कूल, जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल और भागीरथी पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने भी प्रदर्शनी में सहभागिता की। विद्यार्थियों की कलाकृतियों में वन्यजीवों के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश प्रमुखता से दिखाई दिया। प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग, गाजियाबाद ईशा तिवारी ने कहा कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है। बच्चों और युवाओं में प्रकृति एवं वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता पैदा करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि चित्रकला जैसी रचनात्मक गतिविधियां विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब लाने के साथ उन्हें संरक्षण का महत्व समझाने का प्रभावी माध्यम हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे वन्यजीवों और पर्यावरण के प्रति स्वयं जागरूक रहें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी इसके संरक्षण के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे ही भविष्य में पर्यावरण संरक्षण की मजबूत नींव तैयार करेंगे। उप प्रभागीय वन अधिकारी डॉ. सलोनी ने कहा कि वन्यजीव और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहना स्वस्थ पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव सप्ताह जैसे आयोजनों का उद्देश्य केवल कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि लोगों को यह समझाना है कि जैव विविधता का संरक्षण सीधे हमारे भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जिज्ञासा और संवेदनशीलता पैदा करने के लिए ऐसी गतिविधियां लगातार आयोजित की जानी चाहिए। चित्रों के माध्यम से बच्चों ने जिस तरह वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है, वह सराहनीय है।
कार्यक्रम के दौरान ईशा तिवारी ने क्विज प्रतियोगिता और खजाना खोज प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले तथा विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में आगे भी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय वन अधिकारी गाजियाबाद निमी कुचिया, क्षेत्रीय वन अधिकारी मोदीनगर अमित सिंह सहित वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। वन विभाग की ओर से वन्यजीव सप्ताह के दौरान जागरूकता कार्यक्रम, प्रतियोगिताओं और अन्य गतिविधियों के माध्यम से आमजन और विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण के महत्व से अवगत कराया गया। समापन अवसर की चित्रकला प्रदर्शनी ने पूरे अभियान को रचनात्मक और प्रभावी संदेश के साथ विराम दिया।
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