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नई दिल्ली: दिल्ली में अपना घर खरीदना हर परिवार का सपना होता है, लेकिन घर खरीदने से पहले सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कितने बजट का घर लिया जाए? कितनी EMI आसानी से चुकाई जा सकती है? खासकर मिडिल क्लास परिवारों के लिए घर खरीदना सिर्फ प्रॉपर्टी में निवेश नहीं, बल्कि जिंदगी की बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी भी है. ऐसे में 1BHK, 2BHK या 3BHK में से क्या चुनना चाहिए? डाउन पेमेंट में कितनी बचत लगानी चाहिए? इमरजेंसी के लिए कितना पैसा बचाकर रखना चाहिए? इन सभी सवालों पर इकोनॉमिस्ट आकाश जिंदल ने अहम बातें बताई हैं.

दिल्ली में किस बजट में मिलेगा कौन सा घर
आकाश जिंदल के मुताबिक दिल्ली में प्रॉपर्टी की कीमत इलाके के हिसाब से काफी बदलती है. वसंत विहार, चाणक्यपुरी और डिफेंस कॉलोनी जैसे प्रीमियम इलाकों में कीमतें काफी ज्यादा हैं, जबकि रोहिणी जैसे इलाकों में मिडिल क्लास बजट में अलग-अलग साइज के फ्लैट के विकल्प मिल सकते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि रोहिणी में करीब 25-30 लाख रुपये में 1BHK, करीब 80 लाख से 1 करोड़ रुपये में 2BHK और लगभग 1.5 करोड़ से 2.25 करोड़ रुपये तक में 3BHK का ऑप्शन मिल सकता है. लेकिन असली कीमत प्रॉपर्टी की लोकेशन, उम्र, साइज और सुविधाओं के आधार पर अलग हो सकती है.

50 हजार की कमाई है तो 1BHK, 1 लाख पर 2BHK
आकाश जिंदल के अनुसार घर का साइज तय करते समय सबसे पहले अपनी आय और लोन चुकाने की क्षमता देखनी चाहिए. अगर परिवार की मासिक आय करीब 50 हजार रुपये है तो 1BHK जैसे छोटे घर पर विचार किया जा सकता है. वहीं करीब 1 लाख रुपये की मासिक आय पर 2BHK और लगभग 2 लाख रुपये की आय पर 3BHK पर विचार किया जा सकता है. उनका कहना है कि सिर्फ बड़ा घर लेने के लिए अपनी पूरी कमाई EMI में नहीं लगानी चाहिए. घर खरीदने के बाद रजिस्ट्री, दस्तावेज, फर्निशिंग, फर्नीचर और दूसरे खर्च भी आते हैं.

पूरी सेविंग डाउन पेमेंट में लगाना कितना सही
आकाश जिंदल ने इस बात पर खास जोर दिया कि घर खरीदते समय अपनी पूरी बचत डाउन पेमेंट में नहीं लगानी चाहिए. उनके मुताबिक कुल सेविंग्स का करीब 70 फीसदी हिस्सा डाउन पेमेंट में लगाया जा सकता है, जबकि करीब 30 फीसदी पैसा अपने पास लिक्विड फंड के तौर पर रखना चाहिए. उन्होंने समझाया कि फ्यूचर में मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई या अचानक आने वाले बड़े खर्च के लिए पैसे की जरूरत पड़ सकती है. ऐसे में घर खरीदने के बाद अगर पूरी सेविंग खत्म हो गई तो मुश्किल स्थिति पैदा हो सकती है.

लोकेशन से ज्यादा घर का साइज जरूरी
मिडिल क्लास खरीदारों के लिए आकाश जिंदल के मुताबिक दिल्ली में कई मामलों में लोकेशन से ज्यादा घर का साइज जरूरी हो सकता है. परिवार बढ़ने के साथ बच्चों और परिवार के दूसरे सदस्यों को अलग जगह और प्राइवेसी की जरूरत होती है.उनका कहना है कि अगर महंगे इलाके में छोटा घर लेने के बजाय दिल्ली के किसी दूसरे इलाके में थोड़ा बड़ा घर मिल रहा है, तो खरीदार इस विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं. मेट्रो कनेक्टिविटी की वजह से दिल्ली के कई इलाकों से आवागमन आसान हुआ है.

घर खरीदने से पहले एक हफ्ते की रिसर्च जरूरी
आकाश जिंदल ने खरीदारों को सलाह दी कि घर खरीदने का फैसला जल्दबाजी में न लें. प्रॉपर्टी के टाइटल, ओनरशिप, अप्रूवल, अधिकृत निर्माण और जरूरी दस्तावेजों की जांच जरूर करें. संपत्ति का मालिक वही है या नहीं और प्रॉपर्टी आपके नाम सही तरीके से ट्रांसफर हो रही है या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी है.उन्होंने कहा कि भावनाओं में आकर घर खरीदने के बजाय कम से कम एक सप्ताह रिसर्च करनी चाहिए और जरूरी दस्तावेज किसी अच्छे वकील से भी चेक करवाने चाहिए. आखिरकार घर जिंदगी में बार-बार नहीं खरीदा जाता, इसलिए EMI से लेकर सेविंग्स और कानूनी जांच तक हर पहलू देखकर ही फैसला लेना समझदारी है.

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