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  • 27 अभियुक्तों को उम्रकैद, 10 को 20 वर्ष और 11 को 10 वर्ष या उससे अधिक की सजा
  • हत्या, दुष्कर्म, पॉक्सो, लूट, डकैती समेत गंभीर मामलों में प्रभावी पैरवी से मिली सफलता
  • डिजिटल साक्ष्यों और अभियोजन से बेहतर समन्वय ने मजबूत की पुलिस की पैरवी, 2025 के मुकाबले 176 अधिक को सजा

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने के साथ उन्हें न्यायालय से सजा दिलाने के लिए कमिश्नरेट पुलिस का ऑपरेशन कन्विक्शन लगातार प्रभावी साबित हो रहा है। वर्ष 2026 में जनवरी से अगस्त तक पुलिस ने प्रभावी पैरवी और मजबूत साक्ष्यों के दम पर 584 अभियुक्तों को न्यायालय से सजा दिलाई है। इनमें 27 अभियुक्तों को आजीवन कारावास, 10 को 20 वर्ष, 11 को 10 वर्ष या उससे अधिक और 19 अभियुक्तों को पांच से नौ वर्ष की सजा सुनाई गई। वहीं 517 अभियुक्तों को पांच वर्ष से कम की सजा हुई है। पुलिस के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 408 अभियुक्तों को सजा दिलाई गई थी। इस लिहाज से इस वर्ष महज आठ माह में ही पिछले पूरे साल की तुलना में 176 अधिक अभियुक्तों को सजा दिलाई जा चुकी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सफलता मजबूत विवेचना, वैज्ञानिक एवं डिजिटल साक्ष्य, प्रभावी पैरवी और अभियोजन पक्ष के साथ बेहतर समन्वय का परिणाम है।

पुलिस आयुक्त जे. रविन्दर गौड़ ने बताया कि अपराध नियंत्रण और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से एक जुलाई 2025 को कन्विक्शन सेल का गठन किया गया था। सेल का मुख्य उद्देश्य गंभीर और संज्ञेय अपराधों में त्वरित कार्रवाई, निष्पक्ष विवेचना, मजबूत साक्ष्य संकलन और प्रभावी पैरवी के माध्यम से दोषियों को जल्द सजा दिलाना है। कन्विक्शन सेल की ओर से हत्या, हत्या के प्रयास, दहेज हत्या, दुष्कर्म, पॉक्सो अधिनियम, अपहरण, लूट, डकैती, चोरी, गैंगस्टर अधिनियम, एनडीपीएस और आबकारी अधिनियम समेत गंभीर मामलों की लगातार निगरानी की जाती है।

पुराने और लंबित मामलों की समीक्षा कर उनकी प्राथमिकता तय की जाती है। इसके बाद अभियोजन अधिकारियों के साथ नियमित बैठक कर मुकदमों की प्रगति की समीक्षा की जाती है। पुलिस के मुताबिक गवाहों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ न्यायालय में मजबूत और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि लगातार अधिक संख्या में अभियुक्तों को न्यायालय से सजा मिल रही है।

डिजिटल साक्ष्यों से मजबूत हुई पैरवी
कन्विक्शन सेल की कार्यप्रणाली में डिजिटल साक्ष्यों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन प्रणाली का इस्तेमाल बढ़ाया है, जिससे साक्ष्यों को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखने और न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में मदद मिली है। पुलिस आयुक्त के अनुसार विवेचनाओं की गुणवत्ता में सुधार, वैज्ञानिक साक्ष्यों के प्रभावी संकलन, डिजिटल माध्यमों से अभिलेखों के व्यवस्थित प्रबंधन और अभियोजन पक्ष के साथ बेहतर समन्वय पर लगातार काम किया जा रहा है। इसका सीधा असर न्यायालय में अभियोजन की पैरवी पर पड़ा है।

मसूरी और सिहानी गेट के मामलों में उम्रकैद
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मसूरी और सिहानी गेट थाने के दो मामलों में भी आरोपियों को उम्रकैद की सजा हुई। मसूरी थाने में दर्ज दहेज अधिनियम और हत्या के मामले में ग्राम शेरपुर खिचरा निवासी गुलशन को हत्या का दोषी ठहराते हुए अदालत ने आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। धारा 498ए के तहत भी उसे तीन वर्ष के सश्रम कारावास और दो हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया।

वहीं सिहानी गेट थाने में दर्ज हत्या और आयुध अधिनियम के मामले में राकेश मार्ग निवासी दिनेश दिवाकर को अदालत ने आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। आयुध अधिनियम के तहत दो वर्ष का कारावास और दो हजार रुपये जुर्माना तथा धारा-27 के तहत तीन वर्ष का कारावास और तीन हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया।

2025 में 408, आठ माह में 584 को सजा
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 408 अभियुक्तों को सजा दिलाई गई थी। इनमें 21 को आजीवन कारावास, आठ को 20 वर्ष, 10 को 10 वर्ष या उससे अधिक, 13 को पांच से नौ वर्ष और 356 अभियुक्तों को पांच वर्ष से कम की सजा हुई थी। वहीं वर्ष 2026 में जनवरी से अगस्त तक 584 अभियुक्तों को सजा मिली है। पुलिस आयुक्त ने प्रभावी पैरवी में निष्ठा और लगन से काम करने वाले कन्विक्शन सेल के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित

भी किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय में मजबूत पैरवी के माध्यम से अपराधियों को सजा दिलाना और पीडि़तों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना पुलिस की प्राथमिकता है। इसके लिए विवेचना की गुणवत्ता, वैज्ञानिक साक्ष्य, डिजिटल अभिलेख प्रबंधन और अभियोजन के साथ समन्वय को और मजबूत किया जाएगा।

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