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देशभर में बारिश और खराब मौसम के बीच एक नाम खूब चर्चा में है- ‘साइक्लोन अर्नब’. सोशल मीडिया से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक में इसकी खूब चर्चा हो रही है. लेकिन, इसके साथ ही सबसे दिलचस्प बात यह है कि मौसम विभाग ने इसे चक्रवात माना ही नहीं है. ऐसे में सवाल यह कि जब यह चक्रवात यानी साइक्लोन है ही नहीं तो फिर इसको साइक्लोन अर्नब या अर्नब चक्रवात नाम से क्यों पुकारा जा रहा है? यह नाम आया कहां से? क्या यह किसी व्यक्ति का नाम है, इसका कोई फुल फॉर्म है या किसी देश ने इसे चुना है?

दरअसल, तकनीकी रूप से IMD ने इसे साइक्लोन यानी चक्रवात घोषित ही नहीं किया था. ये बंगाल की खाड़ी में बना एक डीप डिप्रेशन (Deep Depression) था जो नमी लेकर उत्तर भारत की तरफ बढ़ा, और इसी वजह से ओडिशा, आंध्र प्रदेश के बाद छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार में पिछले 72 घंटे में भारी बारिश हुई. सबसे पहले 23-24 सितंबर की रात को यह Deep Depression यानी गहरा अवदाबआंध्र के कलिंगापटनम के पास लैंडफॉल किया.

इसको ऐसे समझिए कि- मौसम विज्ञान में यह समुद्र या वायुमंडल में बना कम दबाव का एक शक्तिशाली क्षेत्र होता है, वह गहरा अवदाब या डीप डिप्रेशन कहलाता है और यह चक्रवात बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है. यही गहरा अवदाब या डीप डिप्रेशन साइक्लोन तब कहलाता जब 3 मिनट की औसत हवा की रफ्तार 63 किमी प्रति घंटा या 34 नॉट से ज्यादा हो जाता. लेकिन, ये डीप डिप्रेशन सिस्टम 55-65 किमी की रफ्तार पर अटका रहा, इसलिए ऑफिशियली ये साइक्लोन अर्नब बना ही नहीं. लेकिन, इस भारी दबाव के कारण मौसम में परिवर्तन को सोशल मीडिया पर पहले ही अगले नाम को लेकर इसे अर्नब कह दिया गया.

अर्नब का कोई फुल फॉर्म नहीं, बांग्लादेश से है कनेक्शन

इसके साथ ही यह भी जान लीजिए कि अर्नब कोई शॉर्ट फॉर्म नहीं है. इसका कोई फुल फॉर्म नहीं होता और यह बांग्लादेश की ओर से सुझाया गया नाम है. दरअसल, बंगाली भाषा में अर्नब का मतलब समुद्र या Ocean या महासागर होता है. इसका उच्चारण विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization) यानी WMO लिस्ट में ‘Ornab’ बताया गया है. यानी इस नाम का किसी व्यक्ति से सीधा संबंध नहीं है. बता दें कि WMO संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है जो 1950 से दुनिया भर के मौसम विभागों को कंट्रोल करती है. इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जेनेवा में है.

WMO लिस्ट क्या है?

साइक्लोन के नाम की लिस्ट को WMO/ESCAP पैनल बनाता है. ESCAP का फुल फॉर्म – United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific. उत्तर हिंद महासागर (Arabian Sea + Bay of Bengal) के साइक्लोन के लिए 13 देश मिलकर नाम देते हैं. अपनी ओर से हर देश 13-13 नाम भेजता है. कुल 169 नाम की लिस्ट बनी हुई है जो बारी बारी से चलती है.

13 देश कौन से हैं?

भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव, म्यांमार, थाईलैंड, ओमान, ईरान, सऊदी अरब, UAE, कतर, यमन.नाम कैसे चलता है. जैसे इस बार लिस्ट में अगला नाम बांग्लादेश का भेजा हुआ अर्नब (Ornab = Ocean) था, तो सबने उसे अर्नब (Arnab) कहना शुरू कर दिया. यहां यह भी जानिए कि अब अगर इस सिस्टम के बाद फिर से साइक्लोन बनेगा तो उसके बाद वाला नाम लिस्ट में भारत का दिया हुआ नाम होगा.

तबाई मचाई और नाम लिस्ट से हटाई

खास बात यह भी है कि एक बार जो नाम तबाही मचा देता है, उसे लिस्ट से हटा दिया जाता है. इसके कई उदाहरण हमारे सामने पूर्व में भी हैं. जैसे- Titli, Fani, Amphan जैसे चक्रवात आ चुके हैं और तबाही मचा चुके हैं. अब इनका नाम लिस्ट में नहीं है. ऐसे में सीधा समझिए कि WMO लिस्ट मतलब 13 देशों की पहले से लिखी हुई पर्ची, जिसमें से एक नाम निकालकर साइक्लोन को दिया जाता है ताकि याद रखना आसान हो और सभी देशों में अलर्ट देना आसान हो जाए.

साफ-साफ समझ लीजिए

  • डिप्रेशन (Depression) यानी अवदाब: सतह पर अधिकतम निरंतर हवा की गति 31 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा (17 से 27 नॉट) के बीच होती है. इसमें दो बंद समदाब रेखाएं होती हैं.
  • डीप डिप्रेशन (Deep Depression) यानी गहरा अवदाब: सतह पर अधिकतम निरंतर हवा की गति 52 से 61 किलोमीटर प्रति घंटा (28 से 33 नॉट) तक होती है. इसमें तीन बंद समदाब रेखाएं होती हैं.
  • साइक्लोनिक स्टॉर्म (Cyclonic storm) यानी चक्रवाती तूफान: सतह पर हवा की गति कम से कम 63 किलोमीटर प्रति घंटा (34 नॉट) या उससे अधिक होनी चाहिए. इसके साथ चार या उससे अधिक बंद समदाब रेखाएं होती हैं.

नाम नहीं मिला, फिर भी बारिश से तबाही मुमकिन

इसको आगे समझिए कि जब कोई मौसम प्रणाली चक्रवाती तूफान बनती है, तो सूची में अगला नाम उसे दे दिया जाता है. अर्नब भी इसी सूची में अपनी बारी का इंतजार कर रहा है. किसी मौसम प्रणाली को चक्रवात का नाम नहीं मिला है, इसका मतलब यह नहीं कि वह खतरनाक नहीं है. डीप डिप्रेशन भी भारी बारिश, जलभराव, नदियों में उफान और भूस्खलन जैसी स्थितियां पैदा कर सकता है. इसलिए मौसम की गंभीरता का अंदाजा सिर्फ तूफान के नाम से नहीं, बल्कि हवा की रफ्तार, बारिश की चेतावनी और स्थानीय प्रशासन की सलाह से लगाना चाहिए. अर्नब नाम भले ही अभी इस्तेमाल नहीं हुआ हो, लेकिन बिना नाम वाला मौसम तंत्र भी बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है. साफ है कि यह डीप डिप्रेशन भी अपना प्रभाव छोड़ गया है, लेकिन चक्रवात के स्तर जैसा खतरनाक प्रभाव नहीं पड़ा है.

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