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  • पहले चरण में 49.62 हेक्टेयर में हाईटेक टाउनशिप, 24.12 हेक्टेयर जमीन का भू-उपयोग कृषि से आवासीय
  • -मोरटी में लैंड पूलिंग से जुटेगी स्टेडियम की जमीन, ड्राफ्ट एमओयू और फिजिबिलिटी रिपोर्ट को मंजूरी
  • आवास, कारोबार, हरियाली और ट्रैफिक का संतुलन; 16 प्रस्तावों पर बोर्ड की सर्वसम्मति से लगी मुहर

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर के सुनियोजित विस्तार और आधुनिक सुविधाओं के विकास की दिशा में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने गुरुवार को कई अहम फैसले लिए। जीडीए की 174वीं बोर्ड बैठक में महत्वाकांक्षी हरनंदीपुरम आवासीय योजना के पहले चरण को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया। करीब 49.62 हेक्टेयर क्षेत्रफल में विकसित होने वाले पहले चरण के तलपट मानचित्र को मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही भोवापुर और शाहपुर निज मोरटा में अधिगृहीत 24.1213 हेक्टेयर भूमि के भू-उपयोग को कृषि से आवासीय करने के प्रस्ताव पर भी मुहर लग गई। राजनगर एक्सटेंशन में मोरटी के पास प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के लिए लैंड पूलिंग के जरिए जमीन लेने का प्रस्ताव भी बोर्ड ने मंजूर कर दिया। इसके लिए उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) के स्वामित्व वाली भूमि को लैंड पूलिंग के माध्यम से लेने के साथ ड्राफ्ट समझौता ज्ञापन और व्यवहार्यता रिपोर्ट के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। बैठक में आवास, खेल, रोजगार, उद्योग और बुनियादी ढांचे से जुड़े करीब 16 प्रस्ताव रखे गए, जिन्हें सर्वसम्मति से मंजूरी मिली।

गुरुवार को जीडीए सभागार में दोपहर करीब एक बजे मेरठ मंडल के मंडलायुक्त एवं जीडीए अध्यक्ष भानू चंद्र गोस्वामी की अध्यक्षता में बोर्ड बैठक हुई। इसमें जीडीए उपाध्यक्ष नन्द किशोर कलाल सहित अन्य अधिकारियों और नामित सदस्यों ने प्रस्तावों पर चर्चा की। जीडीए उपाध्यक्ष नन्द किशोर कलाल के मुताबिक, हरनंदीपुरम योजना का कुल प्रस्तावित क्षेत्रफल करीब 501.2173 हेक्टेयर है। योजना को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। पहले चरण में ग्राम भोवापुर और शाहपुर निज मोरटा में किसानों से सहमति के आधार पर अधिगृहीत 47.1612 हेक्टेयर भूमि में से 24.1213 हेक्टेयर भूमि का भू-उपयोग कृषि से आवासीय किए जाने को बोर्ड ने मंजूरी दी है। पहले चरण के लिए करीब 49.62 हेक्टेयर का तलपट मानचित्र तैयार किया गया है। सड़क चौड़ीकरण, जोनल रोड और अन्य जरूरी प्रावधानों को शामिल करने के बाद लगभग 25.40 हेक्टेयर नेट स्कीम एरिया में आवासीय, व्यावसायिक और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। योजना में केवल मकान और भूखंड विकसित करने के बजाय इसे आधुनिक सुविधाओं से युक्त सुनियोजित टाउनशिप के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

तैयार मानचित्र के अनुसार कुल क्षेत्रफल में करीब 50.18 प्रतिशत हिस्सा आवासीय उपयोग के लिए रखा गया है। करीब 6.30 प्रतिशत क्षेत्र व्यावसायिक गतिविधियों के लिए होगा। सामुदायिक सुविधाओं के लिए 5.46 प्रतिशत तथा क्षेत्रीय मनोरंजन और हरित क्षेत्र के लिए 7.42 प्रतिशत स्थान प्रस्तावित किया गया है। वहीं करीब 30.66 प्रतिशत क्षेत्र यातायात और सड़कों के लिए रखा गया है। इससे योजना में आवास के साथ सड़क, बाजार, पार्क, सामुदायिक सुविधाओं और मनोरंजन के लिए भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध रहेगा। जीडीए की यह योजना करीब दो दशक बाद शहर के बड़े आवासीय विस्तार के रूप में सामने आई है। मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना के बाद हरनंदीपुरम को शहर की अगली बड़ी टाउनशिप के तौर पर विकसित करने की तैयारी है। जीडीए के मुताबिक, योजना को सामान्य कॉलोनी के बजाय आधुनिक टाउनशिप के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें गोल्फ कोर्स, फूड कोर्ट, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाओं के साथ स्मार्ट शहरी ढांचे के विकास की भी योजना है।

जीडीए की 174वीं बोर्ड बैठक

बोर्ड से ले-आउट को मंजूरी मिलने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और अन्य तकनीकी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे हरनंदीपुरम के जल्द जमीन पर उतरने की उम्मीद बढ़ गई है। बैठक में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़, हापुड़ जिलाधिकारी कविता मीना, जीडीए उपाध्यक्ष नन्द किशोर कलाल, नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक, जीडीए सचिव विवेक कुमार मिश्रा, अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह, वित्त नियंत्रक एसके गौतम, मुख्य वास्तुविद एवं नगर नियोजक अरविंद कुमार, टीपी राजीव रतन शाह, मुख्य अभियंता आलोक रंजन, संयुक्त निदेशक कोषागार एवं पेंशन सतीश कुमार, एनसीआर सेल के सीटीसीपी एवं चीफ कोऑर्डिनेटर प्लानर विशाल भारती, यूपीसीडा के आरएम प्रदीप कुमार सत्यार्थी तथा बोर्ड के नामित सदस्य पवन गोयल और केशव त्यागी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

क्रिकेट का नया मैदान, लैंड पूलिंग से जुटेगी जमीन
बोर्ड बैठक का एक अहम फैसला राजनगर एक्सटेंशन में मोरटी गांव की जमीन पर प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम से जुड़ा रहा। स्टेडियम के निर्माण के लिए जमीन जुटाने के प्रस्ताव को बोर्ड ने मंजूरी दे दी। इसके तहत यूपीसीए के स्वामित्व वाली भूमि को लैंड पूलिंग के माध्यम से लेने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके साथ स्टेडियम निर्माण के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट समझौता ज्ञापन (एमओयू) और व्यवहार्यता रिपोर्ट के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली है। अब संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। स्टेडियम बनने के बाद गाजियाबाद में बड़े स्तर के क्रिकेट आयोजनों की संभावना बढ़ेगी। इससे शहर में होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन, पर्यटन और स्थानीय कारोबार से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

बोर्ड बैठक में इंदिरापुरम योजना के शक्तिखंड-चार स्थित 5,965.29 वर्गमीटर होटल भूखंड का भू-उपयोग बदलकर आवासीय (ग्रुप हाउसिंग) करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इसके साथ तलपट मानचित्र में आंशिक संशोधन को स्वीकृति दी गई। कोयल एन्क्लेव आवासीय योजना के 12,868.88 वर्गमीटर और 2,020 वर्गमीटर के दो ग्रुप हाउसिंग भूखंडों के उपयोग को प्लॉटेड डेवलपमेंट में परिवर्तित करने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगी। इंद्रप्रस्थ आवासीय योजना के 4,353 वर्गमीटर भूखंड का भू-उपयोग प्लॉटेड डेवलपमेंट और एकल बहु-आवासीय इकाइयों के लिए बदलने तथा मानचित्र में संशोधन को भी मंजूरी दी गई।

बिल्डर टाउनशिप और उद्योगों को भी मिली रफ्तार
बोर्ड ने निजी विकासकर्ताओं की बड़ी टाउनशिप परियोजनाओं से जुड़े प्रस्तावों पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए। सनसिटी बिल्डर की करीब 2,420 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाली टाउनशिप के पहले चरण के 589.02 एकड़ के ले-आउट प्लान को मंजूरी दी गई। वहीं सनराइज ग्रीन की ग्राम शाहपुर-बम्हैटा स्थित परियोजना की डीपीआर में संशोधन कर 252.32 एकड़ क्षेत्र के लिए पुनरीक्षित स्वीकृति दी गई। वेव सिटी के सेक्टर-1 में व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े भूखंडों में जरूरत के अनुसार संशोधन को भी बोर्ड ने हरी झंडी दी। इससे इन परियोजनाओं में नियोजित विकास को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।

हापुड़ में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए हसनपुर लोढ़ा गांव की 13.15 हेक्टेयर कृषि भूमि को एमएसएमई नीति-2022 के तहत औद्योगिक घोषित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इससे क्षेत्र में नए उद्योग स्थापित होने और रोजगार के अवसर बढऩे की संभावना है। इसके अलावा मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना में निर्माणाधीन 198 टू-बीएचके भवनों का मूल्यांकन कराकर उन्हें ‘जैसा है, जहां हैÓ के आधार पर ई-नीलामी के जरिए बेचने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई।

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