- कार्यालय से निकलकर मैदान में उतरी टीम, गांव-गांव अवैध शराब के ठिकानों पर दबिश
- -रात में भी खुली आंखें, लाइसेंसी दुकानों की बंद शटर के पीछे तक निगरानी
- सड़क से सोशल मीडिया तक नजर, तस्करी और अवैध बिक्री पर आबकारी का चौतरफा वार
उदय भूमि संवाददाता
रामपुर। जनाब, यह पुराना वाला रामपुर नहीं, बल्कि नए दौर का रामपुर है। कभी जिले में अवैध शराब का कारोबार करने वाले माफिया और तस्कर बेखौफ होकर अपने धंधे को बढ़ाने में जुटे रहते थे, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। अवैध शराब के कारोबार पर आबकारी विभाग ने लगातार शिकंजा कस रखा है। जिला आबकारी अधिकारी हिम्मत सिंह की सख्त कार्यशैली में विभाग की टीमें न केवल अवैध शराब के अड्डों पर लगातार दबिश दे रही हैं, बल्कि लाइसेंसी दुकानों की निगरानी से लेकर बाहरी राज्यों से होने वाली शराब तस्करी पर भी नजर रख रही हैं। कार्रवाई का दायरा कार्यालय से निकलकर सीधे गांवों और सड़कों तक पहुंच गया है। जिला आबकारी अधिकारी हिम्मत सिंह के नेतृत्व में आबकारी निरीक्षक अरविंद मिश्रा, नंदिनी यादव, संजय सिंह, प्रफुल्ल कुमार सिंह, राम आधार पाल और अनुपम सिंह की टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय हैं। देहात क्षेत्र में अवैध शराब बनाने और बेचने वालों के संभावित ठिकानों को चिह्नित कर वहां लगातार दबिश दी जा रही है। अवैध शराब के अड्डों को ध्वस्त करने के साथ ही शराब निर्माण और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
विभाग ने अपने मुखबिर तंत्र को मजबूत करने के साथ ग्रामीणों से भी लगातार संवाद स्थापित किया है। गांवों में लोगों से अवैध शराब की बिक्री या निर्माण की जानकारी देने की अपील की जा रही है, ताकि सूचना मिलने पर टीम तत्काल मौके तक पहुंच सके। इससे अवैध शराब के कारोबारियों के लिए अपने ठिकानों को छिपाना मुश्किल हो रहा है। टीमों को क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने और किसी भी सूचना को नजरअंदाज नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। आबकारी विभाग की बदली कार्यशैली का एक प्रमुख पहलू यह है कि अधिकारी अब केवल कार्यालय में बैठकर सरकारी कामकाज निपटाने तक सीमित नहीं हैं।
क्षेत्र में लगातार भ्रमण, दुकानों की औचक जांच, अवैध शराब के ठिकानों पर दबिश और शिकायतों के निस्तारण की जमीनी निगरानी को कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया गया है। जिला आबकारी अधिकारी हिम्मत सिंह की सख्ती के साथ टीम के अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रियता से अवैध शराब के खिलाफ अभियान को लगातार गति मिल रही है। विभाग का फोकस अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही लाइसेंसी व्यवस्था में नियमों का पालन सुनिश्चित कराने पर भी है।
दुकान बंद होने के बाद भी निगरानी, विक्रेताओं पर भी नजर
आबकारी विभाग की निगरानी सिर्फ अवैध शराब के कारोबार तक सीमित नहीं है। लाइसेंसी शराब की दुकानों की भी लगातार जांच की जा रही है। अधिकारियों की टीमें दिन के समय दुकानों का निरीक्षण करने के साथ ही रात में दुकानें बंद होने के बाद भी औचक जांच कर रही हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दुकान बंद होने के बाद भी किसी तरह की अवैध बिक्री न हो। विक्रेताओं की कार्यशैली की जानकारी लेने के लिए दुकानों पर आने वाले ग्राहकों से भी संवाद किया जा रहा है। इससे विभाग को बिक्री व्यवस्था और विक्रेताओं के व्यवहार की जमीनी जानकारी मिल रही है। जिला आबकारी अधिकारी की ओर से विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी युवा को शराब नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही युवाओं को शराब से दूर रहने के लिए जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
तस्करी रोकने को सड़कों पर दिन-रात चेकिंग
बाहरी राज्यों से शराब की तस्करी रोकने के लिए आबकारी विभाग की टीमें प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लगातार चेकिंग कर रही हैं। संदिग्ध वाहनों पर विशेष नजर रखी जा रही है। विभाग की कोशिश है कि दूसरे राज्यों से शराब लाकर जिले में खपाने वाले तस्करों के नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। वहीं, आईजीआरएस और सोशल मीडिया के माध्यम से मिलने वाली शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद संबंधित क्षेत्र की टीम को जांच के लिए भेजा जाता है और कार्रवाई को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। जिला आबकारी अधिकारी स्वयं भी जिले के अलग-अलग क्षेत्रों का औचक निरीक्षण करते हैं। लाइसेंसी दुकानों पर अचानक पहुंचकर व्यवस्थाओं की जांच करने से कर्मचारियों और विक्रेताओं में जवाबदेही बनी हुई है।
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