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-हिंडन खादर में कच्ची शराब का खेल थमा तो दुकानों पर कसा शिकंजा, हर बिक्री और हर स्टॉक पर नजर
-शटर बंद होने के बाद भी निगरानी, पॉश मशीन, सीसीटीवी और स्टॉक रजिस्टर की हो रही गहन पड़ताल
-जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम की सख्ती से विक्रेताओं में खलबली, औचक निरीक्षण ने बढ़ाई जवाबदेही

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में अवैध शराब के कारोबार पर शिकंजा कसने के बाद अब आबकारी विभाग ने लाइसेंसी दुकानों की निगरानी भी सख्त कर दी है। वर्षों से हिंडन खादर क्षेत्र में कच्ची शराब के अवैध कारोबार के लिए चर्चित रहे इलाकों में भी विभाग की लगातार कार्रवाई और निगरानी का असर दिखाई दे रहा है। विभाग के अनुसार पिछले कुछ वर्षों से हिंडन क्षेत्र में कच्ची शराब के अवैध कारोबार की सूचना सामने नहीं आई है। इसके बावजूद आबकारी विभाग ने अपने मुखबिर तंत्र को कमजोर नहीं पडऩे दिया है। अब विभाग का पूरा जोर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत अवैध शराब के किसी भी संभावित कारोबार और लाइसेंसी दुकानों पर नियमों के उल्लंघन को रोकने पर है। आबकारी विभाग की टीम केवल शराब की दुकानों के स्टॉक तक सीमित नहीं है, बल्कि दुकान संचालन से जुड़े हर पहलू पर नजर रख रही है। मंगलवार को भी आबकारी निरीक्षकों की अलग-अलग टीमों ने दिन के साथ रात में शराब की दुकानों का निरीक्षण किया। आबकारी निरीक्षक मनोज शर्मा, चमन सिंह, कीर्ति सिंह, अनुज वर्मा, अखिलेश कुमार, चन्द्रजीत सिंह और दिनेश सिंह की टीम ने विभिन्न क्षेत्रों में दुकानों की जांच की। इस दौरान दुकानों के संचालन, स्टॉक, बिक्री व्यवस्था और अन्य निर्धारित मानकों का निरीक्षण किया गया।
दुकानों के बाहर लगे डिस्पले बोर्ड से लेकर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, पॉश मशीन से बिक्री, स्टॉक रजिस्टर की प्रविष्टियों और ग्राहकों से किसी प्रकार की अवैध वसूली तो नहीं की जा रही है, इसकी जांच की जा रही है। विभाग का प्रयास है कि लाइसेंसी दुकानों पर निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन हो और किसी भी स्तर पर अनियमितता मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। आबकारी विभाग की रणनीति अब अवैध शराब के खिलाफ लगातार निगरानी और लाइसेंसी दुकानों में शत-प्रतिशत नियमों के पालन पर केंद्रित है। विभाग का मानना है कि अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह रोकने के लिए केवल कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं, बल्कि लगातार निगरानी, सक्रिय मुखबिर तंत्र और औचक जांच भी जरूरी है। इसी रणनीति के तहत दिन-रात चल रही जांच से अवैध शराब कारोबारियों के साथ-साथ नियमों की अनदेखी करने वाले विक्रेताओं पर भी दबाव बना हुआ है।

हिंडन खादर में कच्ची शराब के धंधे पर निगरानी जारी
हिंडन खादर क्षेत्र लंबे समय से कच्ची शराब के अवैध कारोबार के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है। आबकारी विभाग की लगातार कार्रवाई, निगरानी और मुखबिर तंत्र की सक्रियता के चलते यहां अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी रोक लगी है। विभाग का कहना है कि अवैध कारोबार बंद होने के बावजूद निगरानी में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही है। टीमों को लगातार क्षेत्र में सक्रिय रखा गया है, ताकि कहीं दोबारा अवैध शराब बनाने या बेचने की गतिविधि शुरू न हो सके। जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम की सख्त कार्यशैली के चलते विभागीय टीमों को लगातार सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। खास बात यह है कि दुकानों की जांच केवल दिन के समय ही नहीं की जा रही, बल्कि दुकानें बंद होने के बाद भी क्षेत्रों में भ्रमण और निगरानी की जा रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं कोई विक्रेता दुकान का शटर बंद होने के बाद चोरी-छिपे शराब की बिक्री तो नहीं कर रहा।

पॉश मशीन से बिक्री से लेकर स्टॉक रजिस्टर तक जांच
आबकारी विभाग अब लाइसेंसियों की दुकानों पर नियमों के पालन की भी विस्तृत जांच कर रहा है। टीम यह देख रही है कि शराब की बिक्री निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पॉश मशीन के माध्यम से हो रही है या नहीं। साथ ही दुकान पर उपलब्ध स्टॉक और स्टॉक रजिस्टर में दर्ज विवरण का मिलान किया जा रहा है। दुकान के बाहर लगाए गए डिस्पले बोर्ड की स्थिति और सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली व फुटेज भी जांच के दायरे में है। विभाग की ओर से इस बात पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि ग्राहकों से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि की वसूली तो नहीं की जा रही। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

इसके अलावा 18 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को शराब बेचने के मामलों को लेकर भी विक्रेताओं को स्पष्ट रूप से सतर्क किया गया है। ऐसे मामलों में विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई के साथ उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया अपनाने की बात विभाग की ओर से कही गई है। इस सख्त निगरानी का असर दुकानदारों और विक्रेताओं के बीच भी दिखाई दे रहा है। विभागीय अधिकारियों की जांच का समय पहले से निर्धारित नहीं होने के कारण लाइसेंसी दुकानों पर तैनात कर्मचारियों को हर समय नियमों का पालन करने के लिए सतर्क रहना पड़ रहा है। विभाग का फोकस किसी एक क्षेत्र तक सीमित न रहकर पूरे जिले में शराब की दुकानों की निगरानी पर है।

दिन-रात औचक जांच, टीम को भी नहीं रहती भनक
आबकारी विभाग की कार्यशैली में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव लगातार औचक निरीक्षण को लेकर दिखाई दे रहा है। जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम के स्तर से दुकानों की निगरानी के लिए टीमों को सक्रिय रखा गया है। जांच का समय पहले से तय नहीं होने के कारण कई बार संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों को भी मौके पर पहुंचने तक इसकी जानकारी नहीं होती। इससे दुकानदारों को नियमों के अनुरूप कारोबार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

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