यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने भारत के डिजिटल परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया। गरीब से अमीर, हर कोई इसे आसानी से इस्तेमाल करने लगा। मोदी सरकार का हालिया फैसला – यूपीआई ट्रांजेक्शन पर सरचार्ज लगाना – देश के लिए एक बड़ी चुनौती है।

यूपीआई ने असंगठित क्षेत्र के करोड़ों लोगों को बैकिंग सिस्टम से जोड़ा। इससे उनकी क्रेडिट वैल्यू बनी और उन्हें आसानी से लोन मिल सका। अब सरचार्ज की वजह से छोटे दुकानदार फिर से नकद में लेनदेन करने लगेंगे। इससे असंगठित क्षेत्र को नुकसान होगा और उनकी वित्तीय स्थिति खराब हो सकती है।

यूपीआई ने काले धन के प्रवाह को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सरचार्ज लगने के बाद लोग फिर से नकद में लेनदेन करने लगेंगे, जिससे काला धन का प्रवाह बढ़ेगा। यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक हो सकता है।

सरकार का तर्क है कि यूपीआई को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता दिलाने के लिए बैंकों को कुछ लाभ मिलना चाहिए। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सरकार मास्टरकार्ड और वीजा जैसी बड़ी कंपनियों के दबाव में आ गई है। यह स्वदेशी तकनीक को नुकसान पहुंचा सकता है।

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